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से अधिक का समय ले लिया गया है जबकि इसमें कुछ नई बात नहीं है और इसमें राज्यपाल को केवल विवेकाधीन शक्तियाँ प्रदान करने की बात कही गई है। फिर भी सदस्यगण एक-एक करके इसका विरोध कर रहे हैं। मैं आपसे इस समस्या का निवारण करने की मांग कर रहा हूँ, लेकिन यदि आप ऐसा नहीं कर सकते, तो आप कम से कम हम लोगों को अपनी सीट पर सोने की अनुमति दें या फिर इस सभा में बैठे रहने की बाध्यता से छूट दें। महोदय मैं इस अनुच्छेद का समर्थन करता हूँ।
माननीय सभापतिः यदि मैं गलत नहीं हूँ तो मैं इस मामले में असहाय हूँ। मैं यह सदस्यों के विवेक पर छोड़ देता हूँ।
श्री बृजेश्वर प्रसादः (बोलने के लिए खड़े हुए।)
माननीय सभापतिः इतना होने के बाद भी आप बोलना चाहते हैं? (ठहाके)
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं नहीं समझता कि इस बारे में मेरा उत्तर दिया जाना जरूरी है। इस मामले पर बार-बार चर्चा की जा चुकी है।
¹डॉ. अम्बेडकर के संशोधन को छोड़कर कोई भी अन्य संशोधन स्वीकृत नहीं हुआ। अनुच्छेद 153 संविधान में जोड़ा गया।ह्
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अनुच्छेद 153-क
* माननीय सभापतिः क्या इस संशोधन के बारे में कोई कुछ कहना चाहता है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं संशोधन को स्वीकार नहीं करता।
¹प्रो. के.टी. शाह का संशोधन अस्वीकृत हुआ और अनुच्छेद 154 संविधान में जोड़ा गया।ह्
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अनुच्छेद 160
* माननीय सभापतिः डॉ. अम्बेडकर।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे कुछ भी नहीं कहना है।
अनुच्छेद 160 स्वीकृत हुआ और संविधान में जोड़ा गया।,
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 2 जून, 1949, पृ. 558