अनुच्छेद 167 - Page 112

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विधानमंडलों का सदस्य हो_ पहले का खण्ड उस व्यक्ति के बारे में था जो किसी राज्य की विधायिका का सदस्य तथा संसद का सदस्य हो।

माननीय सभापतिः श्री नजरुद्दीन अहमद का संशोधन है जिसकी संख्या 2403 है लेकिन वह अभी प्रस्तुत किए गए संशोधन संख्या 2404 से कवर हो जाता है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं प्रस्ताव करता हूँः

फ्कि अनुच्छेद 166 के खण्ड (2) का लोप किया जाए।य्

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* माननीय सभापतिः मैं डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तुत किए गए संशोधनों पर एक-एक करके मत लूँगा।

श्री एच.वी. कामतः क्या डॉ. अम्बेडकर मेरे द्वारा उठाए गए मुद्दे का उत्तर नहीं देंगे?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं ऐसा करना जरूरी नहीं समझता।

¹पूर्व उल्लिखित डॉ. अम्बेडकर के सभी संशोधन स्वीकृत हुए। अनुच्छेद 166 संविधान में जोड़ा गया।ह्

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अनुच्छेद 167

* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः

फ्कि अनुच्छेद 167 के खण्ड (1) के उप-खण्ड (घ) के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाएः

(घ)यदि वह भारत का नागरिक नहीं है या उसने किसी विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित कर ली है या वह किसी विदेशी राज्य के प्रति निष्ठा या अनुषक्ति को अभिस्वीकार किए हुए हैं।

श्री महावीर त्यागीः अब जब हम लोग राष्ट्रमंडल के सदस्य हैं, तो इंग्लैंड के बारे में हमारी यथा स्थिति होगी? क्या राजा के प्रति राज्यभक्ति रखना भी निरर्हता मानी जाएगी?

माननीय सभापतिः यह तो संविधान की व्याख्या का मामला है। * ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 2 जून, 1948, पृ. 568

+ पूर्वोक्त पृष्ठ 570-71