अनुच्छेद 167 - Page 114

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देने के लिए खड़ा हुआ हूँ क्योंकि उन्होंने मुझसे एक या दो मुद्दे आधारित प्रश्न पूछे हैं जैसा कि उन्होंने स्वयं कहा है कि वह एक निरक्षर व्यक्ति है, मैं ‘पालन करने’ शब्द को समझने में उनके समक्ष आ रही कठिनाई को समझता हूँ। इसलिए, मैं उन्हें यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि ‘पालन करने’ शब्द के क्या अर्थ हैं। जब कोई देश किसी दूसरे देश पर आक्रमण करता है, तो होता यह है कि स्थानीय निवासी या तो भय के कारण या फिर सैन्य शासन के कारण मिलिट्री गवर्नर जो आक्रमणकारी देश के नाम पर कार्य करता है द्वारा बनाए गए कानूनों का पालन करने लगते हैं। जब तक आक्रमण जारी रहता है और सैन्य शासकों का कब्जा बना रहता है, तो इस प्रकार के आचरण को अक्सर यहाँ माफ कर दिया जाता है। अक्सर ऐसा होता कि जब आक्रमणकारी या मिलिट्री गवर्नर की आज्ञा को मानना वास्तव में आवश्यक नहीं रह जाता क्योंकि नियंत्रण में ढील दे दी जाती है या फिर शत्रुता खत्म हो गई होती है, तो भी कतिपय लोग मिलिट्री गवर्नर या आक्रमणकारी की आज्ञा मानना जारी रखते हैं। कानून के अधीन उनके आचरण को ‘अनुपालन’ कहा जाता है। यह ‘स्वीकार करने’ से अलग है। इस प्रकार के मामले में संरक्षा प्रदान करने हेतु ‘अनुपालन’ शब्द का प्रयोग किया गया है।

मेरे मित्र श्री त्यागी भी इस प्रश्न पर काफी उत्तेजित रहे हैं कि किन देशों को विदेश माना जाए। मुझे इस बारे में पूरा विश्वास है कि मेरे मित्र श्री त्यागी की मंशा मुझे राष्ट्रमंडल के देशों के साथ संबंध पर चर्चा में मुझे शामिल करने की नहीं है, क्योंकि इस मामले पर सभा में पहले ही चर्चा हो चुकी है तथा सभा उसे निपटा चुकी है, लेकिन मैं उन्हें बताना चाहता हूँ कि यह परिभाषित करने हेतु कि किन देशों को विदेश माना जाए, अनुच्छेद 303 के उप-खण्ड (1) में संशोधन करने का मेरा प्रस्ताव है और यदि मेरे मित्र श्री त्यागी के पास संशोधनों की मुद्रित सूची का खण्ड प्प् उपलब्ध हो, तो वह उसमें प्रस्तावित संशोधन देख सकते हैं। प्रस्तावित संशोधन राष्ट्रपति को यह घोषणा करने की शक्ति प्रदान करता है कौन-कौन से देश विदेश हैं और उसी घोषणा से यह शासित होगा कि कोई देश विदेश है अथवा नहीं। अपने मित्र श्री त्यागी के लाभ के लिए मैं एक शब्द का स्पष्टीकरण जोड़ना चाहता हूँ। कई लोग इस बात को लेकर चिंतित दिखाई पड़ते हैं कि प्रस्तावित संशोधन अथवा राष्ट्रमंडल समझौते के अधीन किसी देश को विदेश नहीं माना जाएगा तो उन देशों के ऐसे सभी लोगों जो इस देश में निवास करते हैं, को स्वतः ही नागरिकता संबंधी सभी अधिकार प्राप्त हो जाएंगे जो इस देश के लोगों को इस संविधान के द्वारा प्रदान किया जा रहा है। मैं अपने मित्रों को यह बताना चाहता हूँ कि ऐसा कुछ नहीं होने जा रहा। राष्ट्रमंडल देशों के बीच संबंध के बारे में स्थिति इस प्रकार होगी, सभी डोमिनियम देशों में, निवासियों को तीन श्रेणियों

* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 2 जून, 1949, पृ. 573-74