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हम यह जानना चाहते हैं कि क्या उन्हें संविधान में विनिर्दिष्ट किया जाना संभव है या नहीं।
माननीय सभापतिः वह इस बारे में बता रहे हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं इसकी कठिनाई का उल्लेख कर रहा हूँ। यदि हमारा संबंध केवल इन्हीं दो बातों अर्थात् भाषण की स्वतंत्रता और गिरफतारी से संरक्षा से हो, तो इन बातों का अनुच्छेद में ही आसानी से उल्लेख किया जा सकता था और हमें हाउस ऑफ कॉमन्स का उल्लेख करना ही नहीं पड़ता। लेकिन संसद के संबंध में जिन विशेषाधिकारों का हम उल्लेख करते हैं वे इन दो विशेषाधिकारों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक हैं और वे सदस्यों से संबंधित हैं। उदाहरण के लिए, संसद का विशेषाधिकार जनता के विरुद्ध तक विस्तारित हो सकता है। दूसरे, उन अधिकारों को सदस्यों के विरुद्ध वैयक्तिक रूप से भी प्रयोग किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, हाउस ऑफ कॉमन्स के शक्ति और विशेषाधिकारों के मामले में संसद को किसी भी नागरिक को संसद की अवमानना के लिए सजा देने का अधिकार है और ऐसे विशेषाधिकारों का प्रयोग किए जाने के समय न्यायालय का क्षेत्राधिकार खत्म हो जाता है। यह एक महत्त्वपूर्ण विशेषाधिकार है। फिर, संसद किसी भी सदस्य के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र है, यदि उस सदस्य ने संसद के सम्मान को ठेस पहुँचाने वाला कार्य किया हो। व्यक्ति को जेल भेजने जैसे ये मामले काफी गंभीर हैं। संसद की अवमानना के मामले को किसी नागरिक को जेल भेजने जैसे मामले को परिभाषित करने जितना आसान नहीं है। न ही यह कहना आसान है कि किसी सदस्य के कौन-कौन से कृत्यों और कार्यों से संसद की प्रतिष्ठा धूमिल होती है।
पंडित ठाकुर दास भार्गवः हमारा संबंध केवल सदस्यों के विशेषाधिकारों से है संसद के विशेषाधिकारों से नहीं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे बता लेने दें। जैसा कि मैंने बताया है यह परिभाषित करना कोई आसान नहीं है कि किन-किन कार्यों और कृत्यों से संसद की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंच सकती है। उस पर काफी चर्चा करने और उसकी समीक्षा किए जाने की जरूरत है। एक कारण तो यही है कि हमने इन विशेषाधिकारों और संरक्षा को विनिर्दिष्ट करने पर विचार नहीं किया।
लेकिन मेरे मन में और प्रारूप समिति के मन में तनिक भी संशय नहीं है कि संसद के पास कतिपय विशेषाधिकार होने चाहिए, जब संसद की अत्यधिक बदनामी होने लगे और उसकी अनुचित आलोचना की जाने लगे, इस देश में संसदीय संस्था की अवमानना की जाने लगे और जिन नागरिकों के लाभ के लिए संसदीय संस्था कार्य कर रही हो, वही नागरिक उसका आदर करना छोड़ दें।