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98 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मैंने तो कठिनाई का उल्लेख किया है कि इसे वर्गीकृत किया जाना क्यों संभव नहीं हो पाया है। अब मैं कुछ अन्य कठिनाइयों के बारे में बताना चाहता हूँ जो हमने महसूस की है।

मुझे ऐसा लगता है कि यदि हम इस विचार को स्वीकार कर लें कि हमें अधिनियम में ही संसद के विशेषाधिकारों के बारे में विनिर्दिष्ट कर देना चाहिए तो हमें तीन मार्गों का अनुसरण करना होगा। एक तो यह हो सकता है कि संविधान में ही संसद और उसके सदस्यों के विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों के बारे में विस्तार से उल्लेख कर दिया जाए। मैंने लिखित पार्लियामेन्टरी प्रैक्टिस का काफी ध्यान से अध्ययन किया है जो संसद की उन्मुक्तियों और विशेषाधिकारों के बारे में जानकारी का स्रोत है। मैंने उस पुस्तिका की अनुक्रमणिका को देखा है और यह पाया है कि व्यावहारिक तौर पर 8 या 9 कॉलमों में संसद के विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों के बारे में बताया गया है। अतः यदि आप, मैंने जो इस बारे में लिखा है, उसके आधार पर विशेषाधिकारों और संरक्षाओं के बारे में पूर्ण संहिता लिखना चाहते हैं तो संसद के विशेषाधिकारों और संरक्षाओं के संबंध में कम से कम आपको 25 और पृष्ठ जोड़ने पड़ेंगे। मैं नहीं जानता कि इस सभा के सदस्य बीस से पच्चीस पृष्ठों में संसद के विशेषाधिकारों और संरक्षाओं के बारे में विस्तृत विवरण देना पसंद करेंगे या नहीं। एक कारण तो यह था कि हमने ऐसा नहीं किया।

दूसरा तरीका यह हो सकता है, जैसा कि संविधान में कई स्थानों पर यह कहा गया है कि संसद विशेष मामलों में उपबंध कर सकती है तथा जब संसद वह उपबंध नहीं करती, विद्यमान स्थिति बरकरार रहेगी। हम इस दूसरे रास्ते को अपना सकते थे। हम यह उपबंध कर सकते थे कि संसद सदस्यों और इस संस्था के विशेषाधिकार और उन्मुक्तियों को परिभाषित कर सकती है, और जब तक ऐसा नहीं किया जाता है, संविधान के लागू होने की तिथि तक विद्यमान विशेषाधिकार जारी रहेंगे। लेकिन हमारा दुर्भाग्य यह है जैसा कि माननीय सदस्य जानते होंगे कि 1935 के अधिनियम में संसद और इसके सदस्यों के विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों के बारे में कुछ भी उल्लेख नहीं है। उसमें केवल एकमात्र उपबंध यह किया गया है कि भाषण की स्वतंत्रता होगी और संसद में बहस के दौरान कही गई किसी बात के लिए सदस्य पर कोई मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। इसके परिणामस्वरूप उस मार्ग को अपनाया जाना संभव नहीं था क्योंकि संसद या लेजिस्लेटिव असेम्बली के बारे में कोई विशेषाधिकार और संरक्षा के बारे में विवरण विद्यमान नहीं है।

तीसरा विकल्प जिसका हमने अनुसरण किया है, हमारे लिए यह था कि हम यह उपबंध कर दें कि संसद के विशेषाधिकार वही होंगे जो हाउस ऑफ कॉमन्स के विशेषाधिकार हैं। मुझे लगता है कि हाउस ऑफ कॉमन्स का उल्लेख किए जाने के