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अनुच्छेद 112
ऽ माननीय डॉ. बी.आर.अम्बेडकरः मैं नहीं समझता कि कहने के लिए कुछ है।
माननीय सभापतिः प्रस्ताव हैः
फ्कि अनुच्छेद 112 में, ‘जिन मामलों में इस संविधान के अनुच्छेद 110 या अनुच्छेद 111 के उपबंध लागू नहीं होते, ‘‘पहली अनुसूची के भाग प्प्प् में विनिर्दिष्ट वर्तमान में राज्यों को छोड़कर शब्दों को हटा दिया जाए।’’
संशोधन स्वीकृत हुआ।
[ अनुच्छेद 112, यथासंशोधित रूप में, संविधान में जोड़ा गया। ]
* * * * *
नया अनुच्छेद 112-क
ऽऽ माननीय सभापतिः डॉ. अम्बेडकर द्वारा एक नए अनुच्छेद का प्रस्ताव करने की सूचना है, संशोधन संख्या 191ः
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः
‘‘कि संशोधनों की सूची के संशोधन संख्या 1932 के संदर्भ में, अनुच्छेद 112 के बाद निम्नलिखित नया अनुच्छेद अन्तःस्थापित किया जाएः
उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित निर्णयों या आदेशों का पुनर्विलोकन
‘112-क संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के या इस संविधान के अनुच्छेद 121 के अधीन बनाए गए नियमों के अधीन रहते हुए, उच्चतम न्यायालय को अपने द्वारा सुनाए गए निर्णय या दिए गए आदेश का पुनर्विलोकन करने की शक्ति होगी।
महोदय, प्रारूप संविधान, जैसा कि अभी.......... ***
प्रो. शिब्बनलाल सक्सेनाः औचित्य का प्रश्न है, महोदय, संशोधन संख्या 1932 प्रस्तुत नहीं किया गया है।
माननीय सभापतिः उसे प्रस्तुत नहीं किया गया है। मैं इसे नये अनुच्छेद के रूप में ले रहा हूँ।
श्री टी.टी. कृष्णमाचारीः महोदय, मैं यह बताना चाहता हूँ कि संशोधन संख्या
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 6 जून, 1949, पृ. 640
** ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 6 जून, 1949, पृ. 640-41
*** डॉट्स व्यवधान दर्शाता है।