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उनका ध्यान अनुच्छेद 121 में एक और खड (ख ख) जोड़े जाने हेतु सूची- I में मेरे द्वारा प्रस्तावित संशोधन संख्या 42 की ओर ध्यान नहीं गया है, जो कि समीक्षा किए जाने हेतु नियम बनाने से संबंधित है। इसलिए इन दो परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह आवश्यक है कि उच्चतम न्यायालय की समीक्षा करने की शक्ति अनुच्छेद 121 तथा संशोधन संख्या 42 दोनों के ही विषयाधीन होनी चाहिए।
[ (अनुच्छेद 112-क स्वीकृत हुआ और संविधान में जोड़ा गया।) ]
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माननीय सभापतिः संख्या 113
श्री टी.टी. कृष्णमाचारीः सभा ने पहली सूची के भाग प्प्प् में से राज्य शब्द के उल्लेख को पूरी तरह से हटाने की बात कही है और इसलिए यह अनुच्छेद आवश्यक नहीं रह गया है। आप सभा में इसे औपचारिक तौर पर रख दें ताकि सभा इसे अस्वीकृत कर दे।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यही ठीक है।
[ (अनुच्छेद 113 को संविधान से हटा दिया गया।) ]
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अनुच्छेद 114
माननीय सभापतिः अनुच्छेद 114 श्री गुप्ते का एक संशोधन है।
(संशोधन प्रस्तुत नहीं किया गया।)
क्या कोई कुछ बोलना चाहता है?
ऽमाननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे मित्र श्री अलादी कृष्णमाचारी अय्यर ने मेरा ध्यान इस तथ्य की ओर दिलाया है कि उच्चतम न्यायालय की शक्तियों का उल्लेख करने वाले प्रारूप संविधान में आयकर मामलों में अपील किए जाने का उपबंध नहीं किया गया है। मैं यह कहना चाहता हूँ कि मैं इस मामले पर विचार कर रहा हूँ और जाँच करने पर यदि यह पाता हूँ कि उच्चतम न्यायालय को इस प्रकार के प्राधिकार दिए जाने के उद्देश्य से किन्हीं अनुच्छेदों का प्रयोग नहीं किया जा सकता है तो मैं उस मामले के लिए विशेष तौर पर एक विशेष अनुच्छेद जोड़ने का प्रस्ताव करता हूँ। लेकिन यह अनुच्छेद पारित किया जा सकता है।
[ (अनुच्छेद 114 संविधान में जोड़ा गया।) ]
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* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 6 जून, 1949, पृ. 6