अनुच्छेद 191 - Page 132

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द्वारा कर लगाकर किया जाता है, को कार्यपालिका के दायरे से नहीं हटाया जा सकता।

मैं यह भी बताना चाहता हूँ कि अनुच्छेद 121 में अन्तर्विष्ट उपबंध और भारत सरकार अधिनियम, 1935 के अनुच्छेद 214 जो फेडरल कोर्ट से संबंधित है तथा अनुच्छेद 224 जो उच्च न्यायालयों से संबंधित है, में अन्तर्विष्ट उपबंध बिल्कुल समान हैं। इसलिए आज जो स्थिति विद्यमान है, वास्तव में उसमें कोई बदलाव नहीं आया है। मेरे माननीय मित्र श्री संथानम ने मेरे माननीय मित्र श्री टी.टी. कृष्णमाचारी द्वारा प्रस्तुत संशोधन संख्या 42 के संबंध में जो टिप्पणियाँ की है, उनसे मैं यह समझ पाने में असमर्थ रहा हूँ कि वह वास्तव में क्या मुद्दा उठाना चाहते हैं। इसलिए, मैं कुल मिलाकर यही कह सकता हूँ कि प्रारूप समिति जब संविधान पर दुबारा से नजर डालेगी तो इस मामले पर विचार करेगी और इस संदर्भ में कोई नया वाक्यांश सुझाया जायेगा जो इस अनुच्छेद जिसे हमने उच्चतम न्यायालय को समीक्षा किए जाने की शक्ति प्रदान करने हेतु पारित किया है, के उपबंधों के अनुरूप होगा, तो निःसंदेह उस पर विचार किया जायेगा।

एक दूसरा मुद्दा है जिसका मैं उल्लेख करना चाहूँगा वह है संशोधन संख्या 43। मेरे माननीय मित्र श्री अलादी कृष्णास्वामी अय्यर द्वारा प्रस्तुत संशोधन संख्या 43 जिसे मैं पूरे हृदय से समर्थन करता हूँ, में एक परन्तु रखा गया है, जो कहता है कि अनुच्छेद 110 में उल्लिखित मामलों से अलग मामले में यदि संविधान की व्याख्या का प्रश्न उठता है तो पाँच न्यायाधीशों की एक पीठ के समक्ष अपील की जाएगी और उस प्रश्न का निपटारा हो जाने पर उसे मूल पीठ के पास पुनः वापस भेज दिया जाएगा। अधिनियमित परन्तुक में अनुच्छेद 111 का संदर्भ दिया गया है लेकिन मैं मानता हूँ कि बाद में सभा यदि आपराधिक मामलों से संबंधित अपीलों के क्षेत्राधिकार प्रदान करने का निर्णय लेती है, तो इस परन्तुक का विस्तार किया जा सकता है ताकि आपराधिक मामलों में इस प्रकार की अपील स्वीकार करने की अनुमति उच्चतम न्यायालय को दी जा सके। इसलिए, मेरा यह कहना है कि विभिन्न पक्षों से प्राप्त या सुझाव कि उच्चतम न्यायालय के पास आपराधिक क्षेत्राधिकार होना चाहिए, को सभा स्वीकार करती है, तो इस परन्तुक का विस्तार किया जा सकेगा।

[ (डॉ. अम्बेडकर के 2 संशोधनों सहित 5 संशोधन स्वीकृत हुए। एक संशोधन अस्वीकृत हुआ। अनुच्छेद 121, यथासंशोधित रूप में संविधान में जोड़ा गया।) ]

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अनुच्छेद 191

ऽमाननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महादेय, मैं औपचारिक तौर पर प्रस्ताव करता हूँः

* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 6 जून, 1949, पृ. 656