116 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बम्बईः जनरल)ः मैं वह संशोधन प्रस्तुत नहीं कर रहा हूँ।
माननीय सभापतिः तो फिर, हमें दूसरे संशोधन लेने पड़ेंगे।
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ऽमाननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सभापति महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः
संशोधनों की सूची के संशोधन संख्या 2610 के संदर्भ में, अनुच्छेद 193 के खण्ड (1) के परंतुक के खण्ड (ग) में ‘उच्च न्यायालय’ शब्दों के बाद ‘पहली अनुसूची में वर्तमान में विनिर्दिष्ट किए जा रहे किसी राज्य’ शब्द अन्तःस्थापित किए जाए।’
महोदय, इस संशोधन का उद्देश्य प्राँतों और भारतीय राज्यों के बीच सभी प्रकार के विभेदों को समाप्त करना है ताकि विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के बीच पूरी तरह से अन्तरपरवर्तनीयता सम्भव हो सके।
महोदय, मैं संशोधन की सूची में औपचारिक तौर पर संशोधन संख्या 2614 प्रस्तुत करता हूँः
‘कि अनुच्छेद 193 के खण्ड (2) के उप-खण्ड (क) में ‘राज्य’ शब्द के स्थान पर ‘पहली अनुसूची में वर्तमान में विनिर्दिष्ट किए जा रहे राज्य’ शब्द प्रतिस्थापित किए जाएँ।
महोदय मैं प्रस्ताव करता हूँः
‘कि संशोधनों की सूची के संशोधन संख्या 2614 के संदर्भ में, अनुच्छेद 193 के
खण्ड (2) के उप-खण्ड (क) में ‘किसी राज्य में या जिसके लिए एक उच्च न्यायालय है’ शब्दों के स्थान पर ‘भारत के राज्य क्षेत्र’ शब्द अन्तःस्थापित किए जाएँ।’’
‘‘ कि संशोधनों की सूची के संशोधन संख्या 2614 के संदर्भ में, अनुच्छेद 193 के
खण्ड (2) के उप-खण्ड (ख) के संदर्भ में, ‘उच्च न्यायालय’ शब्दों के बाद ‘पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट किए जा रहे कोई राज्य में’ शब्द अन्तःस्थापित किए जाएँ।
‘‘कि संशोधनों की सूची के संशोधन संख्या 2614 के संदर्भ में, अनुच्छेद 193 के खण्ड (2) के स्पष्टीकरण 1 के उप-खण्ड (ख) के संदर्भ में ‘पहली और दूसरी अनुसूची में वर्तमान में विनिर्दिष्ट किए जा रहे कोई राज्य में’ शब्दों की जगह ‘भारत की सीमा में’ शब्द प्रतिस्थापित किए जाएं।
‘‘संशोधन संख्या 2622 के संदर्भ में.....’’
माननीय सभापतिः उसे प्रस्तुत करने से पूर्व, आप औपचारिक रूप से संशोधन सं. 2622 प्रस्तुत कर सकते हैं।
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 6 जून, 1949, पृ. 664-65