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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं औपचारिक रूप से प्रस्ताव करता हूँः
‘‘कि अनुच्छेद 193 के खण्ड (2) के स्पष्टीकरण II के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जायेः
‘‘स्पष्टीकरण II - इस खण्ड के उप-खण्ड (क) और (ख) में ‘पहली अनुसूची के भाग III में वर्तमान में विनिर्दिष्ट किए जा रहे किसी राज्य के संदर्भ में ‘उच्च न्यायालय’ शब्द का आशय ऐसे न्यायालय से है जिसे राष्ट्रपति ने अनुच्छेद 123 के अधीन इस संविधान के अनुच्छेद 103 और 106 के प्रयोजनार्थ उच्च न्यायालय के रूप में उद्घोषित किया है।
महोदय मैं प्रस्ताव करता हूँः
‘‘कि संशोधनों की सूची के संशोधन संख्या 2622 के संदर्भ में अनुच्छेद 193 के
खण्ड (2) के स्पष्टीकरण II का लोप किया जाए।
संख्या 196 से 200 तक के सभी संशोधनों का उद्देश्य ब्रिटिश भारत और भारतीय राज्यों के बीच सभी प्रकार के भेदों को समाप्त करना है। कुछेक संशोधन विशेषकर संशोधन संख्या 199 और 200 तो मुख्य संशोधन के परिणामी संशोधन हैं।
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* माननीय सभापतिः डॉ. अम्बेडकर, क्या आप इस पर बोलना चाहते हैं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः नहीं, महोदय, मैं नहीं समझता कि इस बारे में कोई उत्तर देना अपेक्षित है।
[ (केवल 4 संशोधन स्वीकृत हुए। शेष अस्वीकृत हुए। अनुच्छेद 193, यथासंशोधित रूप में, संविधान में जोड़ा गया।) ]
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अनुच्छेद 193-क
# माननीय सभापतिः डॉ. अम्बेडकर, क्या आप प्रो. शाह के प्रस्ताव के बारे में कुछ कहना चाहते हैं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सभापति महोदय, मुझे खेद है कि मैं प्रो. शाह के इस संशोधन को स्वीकार नहीं कर सकता। यदि मैं प्रो. शाह की बात को सही-सही समझ पाया हूँ तो उनका यह कहना है कि उनके संशोधन का अन्तर्निहित उद्देश्य न्यायपालिका
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 7 जून, 1949, पृ. 674
# वही, पृष्ठ 678-79