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118 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

और कार्यपालिका के बीच पृथकता के सिद्धांत को संरक्षित करना या फिर उन्हें प्रभावी बनाना है। मेरे विचार से इसमें कोई विवाद नहीं है कि कार्यपालिका और न्यायपालिका का क्षेत्र पृथक होना चाहिए और वस्तुतः उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय से संबंधित सभी अनुच्छेदों के अन्तर्गत उस उद्देश्य को ध्यान में रखा गया है लेकिन प्रश्न यह उठता है, न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच पृथकता किस प्रकार लाई जानी है। जहाँ तक मैं न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक रखने के सिद्धांत को समझ पाया हूँ, इसका अर्थ है कि जब कोई व्यक्ति कोई न्यायिक पद धारण कर रहा हो, तो उसे कोई ऐसा पद नहीं धारण करना चाहिए जिसमें कार्यपालिका की शक्ति अन्तर्ग्रस्त हो। उसी प्रकार से जब कोई व्यक्ति कार्यपालिका का पद धारण किए हुए हो तो उसे न्यायिक पद धारण नहीं करना चाहिए। लेकिन, संशोधन बिल्कुल अलग सिद्धांत से संबंधित है, जहाँ तक मैं इसे समझ पाया हूँ। इसमें यह निर्धारित किया गया है कि न्यायपालिका का सदस्य रहा व्यक्ति न्यायपालिका की सेवा में कतिपय वर्षो तक रहने के बाद कौन सा पद धारण कर सकेगा। मेरे विचार से उसमें एक अलग समस्या को उठाया गया है। लोक सेवा आयोग के मामले में भी यही समस्या उठी है जिस पर हमें विचार करना है कि लोक सेवा आयोग का कोई सदस्य अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद किसी अन्य पद को धारण करने का हकदार है या नहीं। मुझे यह लगता है कि न्यायपालिका के सदस्यों की स्थिति लोग सेवा आयोग के सदस्यों से भिन्न है। मैं पहले बता चुका हूँ कि लोक सेवा आयोग के सदस्य प्रशासनिक सेवाओं की नियुक्तियों के मामले में कार्यपालिका के साथ काफी गहराई से जुड़े होते हैं। न्यायपालिका बहुत हद तक कार्यपालिका से संबंधित नहीं होती है, वह लोगों के अधिकारों और कुछ हद तक भारत सरकार और उसकी इकाइयों के अधिकारों से संबंधित होती है। मेरे विचार से न्यायपालिका बहुत हद तक लोगों के अधिकारों से संबंधित होती है, जिसके बारे में कोई भी सरकार बहुत कम ध्यान देती है। परिणामतः कार्यपालिका द्वारा न्यायपालिका को प्रभावित करने का अवसर बहुत कम हैं और मुझे ऐसा लगता है कि केवल सैद्धान्तिक कारण से किसी व्यक्ति को किसी अन्य पद धारण करने से रोकना किसी चीज को काफी आगे तक ले जाने की बात है। हमें यह बात याद रखनी चाहिए कि हम अपनी न्यायपालिका के लिए जो उपबंध कर रहे हैं, न्यायपालिका में पद धारण करने वाले व्यक्ति के लिए कोई संतोषजनक स्थिति नहीं है। हम उन लोगों के 60 वर्ष पूरे कर लेने पर सेवानिवृत्ति किए जाने का प्रावधान कर रहे हैं जब कि इंग्लैंड में व्यक्ति 70 वर्ष तक की आयु तक उस पद पर बना रह सकता है। यह भी याद रखा जाना चाहिए कि संयुक्त राज्य अमेरिका में उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश व्यवहारिक तौर पर जीवनपर्यन्त पद पर बना रहता है, अतः अमेरिका या ग्रेट ब्रिटेन में न्यायाधीशों द्वारा सेवानिवृत्ति के पश्चात् कोई और पद धारण करने का मामला नहीं के बराबर सामने आता है।