अनुच्छेद 196 - Page 139

120 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अनुच्छेद 195

ऽमाननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं प्रस्ताव करता हूँः

‘‘कि अनुच्छेद 195 में ‘एक घोषणा’ शब्दों के स्थान पर ‘एक प्रतिज्ञान या शपथ’ शब्दों को प्रतिस्थापित किया जाए। यह एक अति औपचारिक संशोधन है।

संशोधन स्वीकृत हुआ।

अनुच्छेद 195, यथासंशोधित रूप में, संविधान में जोड़ा गया।

अनुच्छेद 196

* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं प्रस्ताव करता हूँः

‘‘कि अनुच्छेद 196 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद प्रतिस्थापित किया जाएः उच्च न्यायालय में न्यायाधीश 196, इस संविधान के लागू होने के पश्चात् कोई व्यक्ति रहने के पश्चात् न्यायालय जिसने किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में अथवा किसी प्राधिकरण पद धारण किया है, भारत में किसी न्यायालय या किसी के समक्ष कानूनी पदों पर प्राधिकारी के समक्ष वकालत का कार्य नहीं करेगा। प्रतिबंध यह शब्दों की संरचना में किया गया हेर-फेर मात्र है।

श्री प्रभुदयाल हिम्मत सिंगकाः डॉ. अम्बेडकर द्वारा अभी प्रस्तुत किए गए संशोधन के दृष्टिगत मेरा संशोधन (सं. 2632) आवश्यक नहीं है।

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** माननीय सभापतिः डॉ. अम्बेडकर क्या आप कुछ और कहना चाहते हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं नहीं समझता कि इसमें और कोई चीज जरूरी है।

माननीय सभापतिः मैं पहले सरदार हुकुम सिंह के संशोधन पर मत लूँगा। यदि वह स्वीकृत हो जाता है, तो डॉ. अम्बेडकर का संशोधन इसके द्वारा संशोधित हो जायेगा।

[ (संशोधन अस्वीकृत हुआ। डॉ. अम्बेडकर का संशोधन स्वीकृत हुआ। अनुच्छेद 196, यथासंशोधित रूप में, संविधान में जोड़ा गया।) ]

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* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 7 जून, 1949, पृ. 680

* ख्., वही, पृष्ठ 680

** ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 7 जून, 1949, पृ. 6