122 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. पी.के.सेनः मैं उस संशोधन को प्रस्तुत नहीं करना चाहता।
(संशोधन संख्या 2651, 2652 और 2653 प्रस्तुत नहीं किए गए।)
[ (डॉ. अम्बेडकर का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। अनुच्छेद 198 यथासंशोधित रूप में संविधान में जोड़ा गया।) ]
* माननीय सभापतिः डॉ. अम्बेडकर ने संशोधन संख्या 201 के बारे में सूचना दी है, जो श्री जसपतराय कपूर द्वारा प्रस्तुत संशोधन जैसा है। उस संशोधन को प्रस्तुत किए जाने की जरूरत नहीं है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः
‘‘अनुच्छेद 200 में ‘इस अनुच्छेद के उपबंधों के विषयाधीन’ शब्दों का विलोप किया जाये।
* * * * *
# माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं नहीं सोचता कि इस अनुच्छेद पर इतनी विस्तृत चर्चा होगी क्योंकि उच्चतम न्यायालय से संबंधित एक वैसा ही अनुच्छेद पारित किया जा चुका है। तथापि, चूंकि बहस हो चुकी है और कतिपय सदस्यों ने मुझसे कतिपय निश्चित प्रश्न पूछे हैं। मैं यहाँ उनका उत्तर दे रहा हूँं।
मेरे मित्र श्री कामत ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि अनुच्छेद 200 के मामले में किसी भी देश में कोई पूर्वादाहरण मौजूद है। मुझे इस बात में तनिक भी संदेह नहीं है कि उन्होंने प्रारूप संविधान नहीं पढ़ा है क्योंकि इसकी पाद-टिप्पणी में ही इस बात का उल्लेख है कि अमेरिका और ग्रेट ब्रिटेन में वैसा ही उपबंध विद्यमान है (श्री कामत के कारण व्यवधान उत्पन्न हुआ, जो सुना नहीं जा सका।) इंग्लैंड के सुप्रीम कोर्ट ऑफ जुडिकेयर एक्ट की धारा 8 को शब्दशः रख दिया गया है। इसकी भाषा में भी बिल्कुल फर्क नहीं है। पूर्वादाहरण के संबंध में मेरा उत्तर तो यही है।
लेकिन महोदय, पूर्वोदाहरण के अलावा भी अनुच्छेद 200 जैसे अनुच्छेद के लिए उपबंध किए जाने का पुख्ता आधार है। सभा को यह स्मरण होगा कि हमने अस्थायी या अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति संबंधी प्रत्येक उपबंध को अब पूरी तरह समाप्त कर दिया है और अस्थायी या अतिरिक्त न्यायाधीशों से संबंधित न्यायाधीश स्थायी रहेंगे। मुझे यह प्रतीत होता है कि यदि आप अस्थायी या अतिरिक्त न्यायाधीशों का प्रावधान नहीं करने जा रहे हैं, तो आपको कतिपय कार्य निपटाने के लिए कुछ उपबंध करना होगा क्योंकि
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 7 जून, 1949, पृ. 688
# वही, पृष्ठ 693-95