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माननीय सभापतिः डॉ. अम्बेडकर, क्या आप संशोधन संख्या 2663 प्रस्तुत करना चाहते हैं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः नहीं, महोदय, मैं बख्शी टेक चन्द का संशोधन स्वीकार करता हूँ। मेरे विचार से कोई जबाव आवश्यक नहीं है।
श्री एच.वी. कामतः ‘और’ शब्द के स्थान पर ‘अथवा’ शब्द को प्रतिस्थापित करने के लिए संशोधन प्रस्तुत किया गया है।
डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अनुच्छेद की विषय-वस्तु पर कोई अन्तर नहीं पड़ता।
श्री एच.वी. कामतः इसका अर्थ पर फर्क पड़ता है।
(डॉ. बख्शी टेक चंद का संशोधन)
‘‘संशोधनों की सूची के संशोधन संख्या 2661 के संदर्भ में, अनुच्छेद 202 के खण्ड (1) में, ‘अथवा’ रिट के स्वरूप में आदेशों शब्दों के स्थान पर ‘आदेशों अथवा रिटों जिनमें रिट के स्वरूप वाले आदेश शामिल हैं’’ शब्द प्रतिस्थापित किए जाएं।’’
संशोधन स्वीकृत हुआ।
[ (अनुच्छेद 202, यथासंशोधित रूप में, संविधान में जोड़ा गया।) ]
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अनुच्छेद 203
डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं चाहता हूँ कि अनुच्छेद 203 स्थगित रखा जाये।
माननीय सभापतिः अनुच्छेद 203 स्थगित रखा जाता है।
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अनुच्छेद 204
* डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः
‘‘कि अनुच्छेद 204 के स्पष्टीकरण का लोप किया जाए।’’
महोदय, यह अनावश्यक है।
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* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 7 जून, 1949, पृ. 699