126 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
** श्री ताजमल हुसैनः डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित संशोधन बिल्कुल सही है। मैं संशोधन का समर्थन करता हूँ।
माननीय सभापतिः हम सभा विसर्जित करने से पहले इस अनुच्छेद से संबंधित कार्य को पूरा करा लेना चाहते हैं। बारह बज चुके हैं।
डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे खेद है कि मुझे 12 बजे केबिनेट की बैठक में भाग लेने जाना है।
माननीय सभापतिः फिर मैं नहीं समझता कि इसके पक्ष या विपक्ष में बहुत कुछ कहा जाना बाकी है। जो भी कहा जा सकता था, कह दिया गया है। अब और भाषण नहीं होगा।
डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे मित्र श्री भारती द्वारा की गई समुक्तियों के संबंध में।
माननीय एच.वी. कामतः महोदय, आपने मुझे बोलने के लिए बुलाया है। मैं दो मिनट से अधिक समय नहीं लूँगा। क्या मैं अभी बोलूँ या कल?
माननीय सभापतिः कल।
* * * * *
# माननीय सभापतिः अब हम अनुच्छेद 204 पर चर्चा करेंगे।
डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बम्बई-जनरल)ः महोदय, मैं अनुच्छेद 204 में एक संशोधन प्रस्तुत करना चाहता हूँ। मैंने कहा था कि मैं स्थिति पर विचार करूँगा। मैंने इस पर विचार किया है और मैं यह संशोधन प्रस्तुत करना चाहता हूँ। महोदय, आपकी अनुमति से मैं प्रस्ताव करता हूँ कि संशोधनों की सूची के संशोधन संख्या 2674 के संदर्भ में अनुच्छेद 204 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद प्रतिस्थापित किया जाएः कुछ मामलों का उच्च 204 यदि उच्च न्यायालय इस बात से संतुष्ट हो जाता है कि न्यायालय को अंतरण उसके अधीनस्थ किसी न्यायालय में लंबित किसी मामले में इस
संविधान के निर्वचन के बारे में विधि का कोई सारवान् प्रश्न
अंतर्विलित है जिसका अवधारण मामले के निपटारे के लिए आवश्यक है तो वह उस मामले को अपने पास मंगवा लेगा, और
(क) मामले को स्वयं निपटा सकेगा, या
** ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 7 जून, 1949, पृ. 701
# ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 7 जून, 1949, पृ. 703-04