अनुच्छेद 205 - Page 151

132 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(ख) उक्त विधि के प्रश्न का अवधारण कर सकेगा और उस मामले को ऐसे प्रश्न पर निर्णय की प्रतिलिपि सहित उस न्यायालय को, जिससे मामला इस प्रकार मंगा लिया गया है, लौटा सकेगा और उक्त न्यायालय उसके प्राप्त होने पर उस मामले को ऐसे निर्णय के अनुरूप निपटाने के लिए आगे कार्यवाही करेगा।

संशोधन स्वीकृत हुआ।

श्री सभापति ः अब यह मूल अनुच्छेद हो गया है। इसने प्रस्तुत सभी संशोधनों का स्थान ले लिया है।

प्रस्ताव हैः-

‘‘कि अनुच्छेद 204, यथासंशोधित रूप में, संविधान का भाग बने।’’

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।

अनुच्छेद 204, यथासंशोधित रूप में, संविधान में जोड़ा गया।

[ (डॉ. अम्बेडकर का संशोधन स्वीकृत हुआ। अनुच्छेद 204, यथासंशोधित रूप में, संविधान में जोड़ा गया।) ]

* * * * *

अनुच्छेद 205

माननीय सभापति ः अब सभा अनुच्छेद 205 पर विचार करेगी। इसके सम्बन्ध में डॉ. अम्बेडकर का एक संशोधन है अर्थात् संशोधन संख्या 2676।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः श्रीमान् मैं यह प्रस्ताव उपस्थित करता हूँ किः

‘‘अनुच्छेद 205 के स्थान में निम्नलिखित रखा जायेः-

उच्च न्यायालयों के 205 (1) उच्च न्यायालय के पदाधिकारियों और सेवकों की पदाधिकारी, सेवक नियुक्तियाँ न्यायालय का मुख्य न्यायाधिपति अथवा उसके और व्यय। द्वारा निर्दिष्ट उस न्यायालय का अन्य न्यायाधीश या पदाधिकारी

करेगाः

परन्तु उस राज्य का राज्यपाल जिसमें न्यायालय का मुख्य स्थान है, नियम द्वारा यह अपेक्षा कर सकेगा कि ऐसी किन्हीं अवस्थाओं में, जैसी कि नियम में उल्लिखित हों, किसी ऐसे व्यक्ति को, जो पहले ही न्यायालय में लगा हुआ नहीं है, न्यायालय से सम्बन्धित किसी पद पर राज लोक-सेवा-आयोग से परामर्श किये बिना नियुक्त नहीं किया जायेगा।

(2) राज्य के विधानमण्डल द्वारा निर्मित विधि के उपबन्धों के अधीन रहते हुए उच्च