134 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अनुच्छेद 206
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय में प्रस्ताव करता हूँ कि इस अनुच्छेद का विलोप कर दिया जाये।
[ अनुच्छेद 206 का संविधान से विलोप कर दिया गया। ]
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अनुच्छेद 90-(जारी)
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमान्, मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि अब वित्त-सम्बन्धी अनुच्छेद लिया जाए। हम पहले अनुच्छेद 90 पर विचार-विमर्श कर रहे थे और उसे अब ले सकते हैं।
माननीय सभापतिः जिस दिन हमने इस अनुच्छेद पर विचार-विमर्श स्थगित किया था उस दिन इसके सम्बन्ध में कई संशोधन थे। वे संशोधन 3, 4 और 6 हैं जो डॉ. अम्बेडकर के नाम से हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमान्, मैं यह प्रस्ताव प्रस्तुत करता हूँ किः
‘‘अनुच्छेद 90 के खण्ड (1) के उप-खण्ड (ग) और (घ) के स्थान पर निम्नलिखित उप-खण्ड रखे जायेंः
[ (ग) भारत की संचित-निधि अथवा आकस्मिकता निधि की अभिरक्षा, ऐसी किसी
निधि में धन डालना अथवा उसमें से धन निकालनाः
(घ) भारत की संचित-निधि में से धन का विनियोग_,’’
श्रीमान्, संशोधन संख्या 4 का आशय संशोधन संख्या 3 से हो जाता है और इसलिये मैं उसे उपस्थित नहीं कर रहा हूँ।
श्रीमान्, मैं यह प्रस्ताव भी प्रस्तुत करता हूँ किः
‘‘अनुच्छेद 90 के खण्ड (1) के उप-खण्ड (घ) और (ड.) में भारत का राजस्व शब्दों के स्थान पर भारत की संचित-निधि शब्द रखे जायें।’’
श्रीमान्, इससे पण्डित कुंजरू के संशोधन संख्या (5) का आशय भी पूरा हो जाता है और इसलिये उसकी अब आवश्यकता नहीं रह जाती।
श्रीमान्, आपकी अनुमति से मैं इस अवसर पर एक परिचयात्मक भाषण देना चाहता हूँ ताकि सभा उन कतिपय परिवर्तनों से परिचित हो जाये जिनका सन्निवेश इन संशोधनों में तो नहीं है किन्तु जिनका सम्बन्ध उस वित्त सम्बन्धी प्रक्रिया से है, जिसका अनुसरण वित्त-सम्बन्धी विषयों में करना होगा।