अनुच्छेद 90-(जारी) - Page 155

136 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पश्चात् संसद का उन पर कुछ भी नियंत्रण नहीं रह जाता था। कुछ समय के पश्चात् संसद ने एक भिन्न प्रक्रिया का अनुसरण किया अर्थात् वह कर लगाने लगी और उसका विनियोग एक विशेष कार्य के लिये करने लगी। इसका परिणाम यह हुआ कि जब बजट को स्वीकार करने का समय आता था तो कुछ भी धन शेष नहीं रह जाता था, क्योंकि विभिन्न करों का विनियोग विभिन्न कार्यों के लिये पहले ही से हो जाता था। इस प्रकार बजट में उल्लिखित सामान्य कार्यों के लिये कुछ भी धन शेष नहीं रह जाता था। इस प्रकार विभिन्न करों के विभिन्न कार्यो के लिये विनियोग से जो धन आपका हो जाता था उसे बचाने के लिये इसकी आवश्यकता दिखाई दी कि करों से अथवा अन्य प्रकार से जो राजस्व प्राप्त हो उसका विशेष कार्यो के लिये विनियोग न करके उसे एक निधि में संचित किया जाये ताकि बजट पर निर्णय करते समय संसद को एक निधि प्राप्त हो जिसे वह व्यय कर सके। अर्थात् ऐसी व्यवस्था करने के लिये कि संसद-निर्मित विधि द्वारा विशेष कार्यो में ही करों से प्राप्तत सब धन बिना लोगों की सामान्य आवश्यकताओं का ध्यान रखे हुए ही व्यय न हो, यह आवश्यक है कि एक संचित-निधि स्थापित की जाये। इसलिये मुझे आशा है कि यह सभा संचित निधि सम्बन्धी उपबन्ध स्वीकार करने में किसी कठिनाई का अनुभव नहीं करेगी क्योंकि उसे स्थापित करना बहुत आवश्यक है। मेरा तो यह कहना है कि कोई भी संविधान ऐसा नहीं है, जिसमें संचित-निधि के सम्बन्ध में उपबन्ध न हों। यदि आप आस्ट्रेलिया, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, आयरलैण्ड तथा अन्य देशों के संविधानों की परस्पर तुलना करेंगे तो आपको ज्ञात होगा कि उनमें से प्रत्येक में इस आशय का एक उपबन्ध है कि करों से अथवा अन्य प्रकार संगृहीत सब निधियों का समावेश संचित निधि में होगा। इसलिये हम कोई नई बात करने नहीं जा रहे हैं।

इसके अतिरिक्त, एक अन्य उपबन्ध हम राष्ट्रपति द्वारा प्रमाणित अनुसूची के लिये न रख कर विनियोग अधिनियम के लिये रख रहे हैं। यदि माननीय सदस्य संविधान के मसौदे के अनुच्छेद 94 को देखेंगे तो उन्हें ज्ञात हो जायेगा कि वर्तमान प्रक्रिया क्या है। इस समय इस प्रकार कार्य किया जाता है। राष्ट्रपति अर्थात् शासनारूढ़ सरकार अनुच्छेद 92 के अधीन संसद के सम्मुख एक वित्त-विषय विवरण विशेष रूप से उपस्थित करती है। यह विशेष रूप का वर्णन अनुच्छेद 94 के उप-खण्ड (2) में है। व्यय दो श्रेणियों में विभाजित किया जाता है। एक श्रेणी उस व्यय की होती है जो भारत-राजस्व पर भारित होता है और एक श्रेणी उस व्यय की होती है जो भारत-राजस्व पर अर्थात् संचित निधि पर भारित नहीं होता। इसके पश्चात् अनुच्छेद 93 में विहित कार्यप्रणाली के अनुसार कार्य होता है। अनुच्छेद 93 में विहित कार्य-प्रणाली इस प्रकार है। संसद वित्त-विषयक विवरण के एक-एक शीर्षक, एक-एक उप-शीर्षक तथा एक-एक विषय पर विचार करती है और कार्यपालिका द्वारा उपबन्धित धनराशि को स्वीकार करती है