अनुच्छेद 90-(जारी) - Page 157

138 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

व्यय का अधिप्रमापन विनियोजन-अधिनियम द्वारा होगा न कि प्रमाणीकरण द्वारा। किन्तु उस समय की भारत सरकार को विनियोजन-अधिनियम का विचार मान्य न हुआ और उसका कारण यह था कि गवर्नर जनरल को अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए बजट में धनराशि उपबन्धित करने की शक्ति प्राप्त थी। जैसा कि मैं कह चुका हूँ अन्यथा सैक्रेटरी ऑफ स्टेट स्वयं इस प्रस्ताव के पक्ष में था किन्तु उसके प्रस्ताव को भारत सरकार ने 1935 में अस्वीकार कर दिया। मेरा यह निवेदन है कि अब इस प्रकार के कृत्य को बनाये रखने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि इससे कार्यपालिका को धनराशि उपबन्धित करने तथा व्यय करने की शक्ति प्राप्त हो जाती है। मेरे विचार से हमें अपनी प्रक्रिया को उन सभी देशों की प्रक्रिया के अनुरूप बनाना चाहिये जहां संसद धन-व्यय करने की स्वीकृति प्रदान करने के सम्बन्ध में सर्वशक्ति-सम्पन्न है।

एक अन्य नवीन अनुच्छेद, जो हमने प्रविष्ट किया है, लेखानुदान के सम्बन्ध में है। इसकी व्याख्या करना आवश्यक है कि हमने उसे क्यों प्रविष्ट किया है। इस सम्बन्ध में भी मैं सभा का ध्यान मसौदे के अनुच्छेद 93 की ओर दिलाता हूँ। अनुच्छेद 93 के अधीन किसी भी सेवा के लिये तक तब धन नहीं दिया जा सकता है और न व्यय किया जा सकता है जब तक कि संसद बजट के पूरे विवरण को स्वीकार न कर ले। यदि आप अनुच्छेद 93 को पढ़ेंगे तो देखेंगे कि उसका आशय यही है। बजट को शीर्षो, उपशीर्षो और विषयों के अधीन रखना होता है। संसद को इन शीर्षो, उपशीर्षो और विषयों को स्वीकार करके बजट को स्वीकार करना होता है। बजट को स्वीकार करने का यही अर्थ है। यह सभी को विदित है कि बजट का आकार वृहत् होता है और उसमें 250 करोड़ जैसी धनराशि का विवरण होता है और वह विभिन्न विषयों के अधीन वितरित होता है। यदि अनुच्छेद 93 को वर्तमान रूप में रहने दिया जायेगा, अर्थात् यदि यह उपबन्ध रहने दिया जायेगा कि जब तक संसद पूरे विवरण को स्वीकार न कर ले तब तक किसी प्रकार का धन व्यय नहीं किया जा सकता और यदि यह उपबन्ध भी रहने दिया गया कि प्रत्येक राजकीय वर्ष की समाप्ति के पूर्व बजट स्वीकार कर लिया जाना चाहिये, तो बजट पर विचार-विमर्श के लिये बहुत कम समय रह जायेगा। मुख्यतः इसलिये बहुत कम समय रह जायेगा कि अनुच्छेद 93 के उपबन्धों के अधीन जब तक बजट का पूरा विवरण स्वीकार न कर लिया जाये तब तक धन व्यय नहीं किया जा सकता। इसलिये या तो आप पूरे बजट पर विचार-विमर्श करने के अपने अधिकार को त्याग दीजिये अथवा अनुच्छेद 93 में परिवर्तन कीजिये अथवा अनुच्छेद 93 में अपवादार्थ एक अन्य उपबन्ध रखिये। एक संशोधन द्वारा लेखानुदान की जिसे प्रक्रिया को प्रस्तुत करने का विचार है, उसके अधीन संसद दस वर्ष की सेवाओं पर कुछ समय के लिये, उदाहरणार्थ दो महीने के लिये, धन व्यय करने के लिये कार्यपालिका को एक मुश्त अनुदान के रूप में स्वीकृति प्रदान कर सकेगी ताकि इन दो महीनों में संसद सरकार के बजट