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सम्बन्धी तथा वित्त सम्बन्धी उपबन्धों, पर यदि पूर्ण रूप से नहीं तो कम से कम विस्तृत रूप से, विचार कर सके। यदि आप लेखानुदान के लिये, अर्थात् विपक्षी दल के नेता और सरकार के बीच किसी करार के आधार पर दो या तीन महीने के व्यय के लिये कार्यपालिका को दी जाने वाली धनराशि के लिये लेखानुदान अर्थात् एक मुश्त अनुदान के लिये, उपबन्ध नहीं रखेंगे तो आपको बजट पर विचार-विमर्श करने के लिए उतना ही समय मिल सकेगा जितना कि इस समय मिलता है। सभा को स्मरण होगा कि पिछली बार इस सभा के कई सदस्यों की यह धारणा थी कि बजट को स्वीकार करने में बहुत जल्दी दिखाई गई थी और लोगों को विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श करने के लिये सात-आठ दिन से अधिक समय नहीं दिया गया था और मुखबन्ध के साधन का भी उपयोग किया गया था। इसलिये यदि सभा यह चाहती है कि उसे बजट के विवरण पर तथा वित्त सम्बन्धी उपबन्धों पर विचार-विमर्श के लिये अधिक समय मिले तो संविधान में कोई ऐसा उपबन्ध रखना होगा जिसके अधीन वह कार्यपालिका को संचित-निधि से निकाल कर एक मुश्त धन दे सके ताकि वह उसे दो-तीन महीने तक व्यय कर सके और इस बीच सभा बजट के विवरण पर विचार-विमर्श कर सके। चूंकि अनुच्छेद 93 में उपबन्ध बहुत निर्बन्धक है और वह इस कारण कि जब तक बजट के पूरे विवरण को स्वीकार न कर लिया जाये तब तक किसी प्रकार का धन व्यय नहीं किया जा सकता है, इसलिये हमें अनुच्छेद 93 के उपबन्धों के संबंध में कुछ अपवाद रखने होंगे। ये अपवाद ‘‘लेखानुदान-सम्बन्धी’’ उपबन्धों को स्थान देकर ही किये जा सकते हैं। संविधान के मसौदे से हमने यही तीन मुख्य परिवर्तन किये हैं। श्रीमान् इन शब्दों के साथ मैं अपने संशोधनों को उपस्थित करता हूँ।
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श्री बी.दास ः श्रीमान्, मुझे इसकी प्रसन्नता है कि इन संशोधित अनुच्छेदों से पर्याप्त सुरक्षा हो सकेगी और मंत्री चोरी-छिपे व्यर्थ में धन व्यय न कर सकेंगे। मैं इसके लिये डॉ. अम्बेडकर को फिर बधाई देता हूँ।
माननीय रेवरेण्ड जे.जे.एम. निकोल्सराय (आसामः जनरल) ः श्रीमान्, बोलने के पूर्व मैं डॉ. अम्बेडकर से कुछ बातों के स्पष्टीकरण के लिये आग्रह करना चाहता हूँ। क्या इस संशोधन के फलस्वरूप भारत सरकार इसके लिये बाध्य हो जाती है कि वह एक निधि स्थापित करे जो संचित-निधि के नाम से कही जाये? अथवा यह संशोधन केवल क्षमता-प्रदायक संशोधन है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः यह निधि स्थापित ही है। केवल उसका नाम बदल दिया गया है।
माननीय रेवरेण्ड जे.जे.एम. निकोल्सरायः तब विधान-मण्डल में विनियोजन अधिनियम