अनुच्छेद 90-(जारी) - Page 159

140 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

को पारित करने की आवश्यकता होगी और उसे उसी सत्र में पारित करना होगा?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः जी हां।

माननीय रेवरेण्ड जे.जे.एम. निकोल्सराय ः इसमें निःसंदेह समय लगेगा। श्रीमान्, इसे ध्यान में रखते हुए मैं कुछ बातें कहना चाहता हूँ। भारत सरकार के मंत्रालयों द्वारा अथवा प्रान्तीय सरकारों द्वारा जो धन व्यय होता है, अथवा नष्ट होता है उसकी बहुत आलोचना की गई है। मेरे विचार से अनुच्छेद 90 के सिद्धांतों का अनुसरण प्रान्तीय सरकारों को भी करना होगा क्योंकि यही सिद्धांत अनुच्छेद 174 में भी सन्निहित है।

माननीय डॉ.बी.आर. अम्बेडकर ः जी हाँ।

ऽऽऽऽऽ

माननीय रेवरेण्ड जे.जे.एम. निकोल्सरायः मैं डॉ. अम्बेडकर से पूछन चाहता हूँ कि क्या यही स्थिति है अथवा प्रत्येक प्रान्त को व्यय के लिये धन निकालने के उद्देश्य से विनियोजन अधिनियम को पारित करना बाध्यता होगी।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः विनियोजन अधिनियम को तो अनिवार्य रूप से पारित करना होगा किन्तु लेखानुदान के सम्बन्ध में प्रत्येक मंत्रिमण्डल को इसकी स्वतंत्रता रहेगी कि वह उनकी मांग करे अथवा न करे। यदि कोई मंत्रिमंडल लेखानुदान के रूप में धन प्राप्त करना चाहे तो वह विधानमण्डल से इसकी मांग कर सकता है।

माननीय रेवरेण्ड जे.जे.एम. निकोल्सराय ः यदि आसाम का अथवा किसी प्रान्त का मंत्रिमंडल उसी प्रथा का अनुसरण करना चाहता है, जिसका अनुसरण वह अभी तक करता आया है और राज्यपाल से प्रमाण-पत्र प्राप्त करना चाहता है तो क्या उसे इसकी स्वतंत्रता होगी?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः अब राज्यपाल के प्रमाणपत्र प्राप्त करने का प्रश्न ही नहीं उठता।

मेरे विचार से श्री टी.टी. कृष्णमाचारी ने जो कुछ भी कहा है, मैं उससे अलग कुछ नहीं कह सकता। मुझे अनेक संशोधनों पर बहुत कुछ कहना है, इसलिए मुझे अपने विचार सुरक्षित रखने चाहिए क्योंकि मुझे इस बात में कोई संदेह नहीं है कि वही तर्क फिर दुहराए जायेंगे।

[ (डॉ. अम्बेडकर द्वारा पहले रखा गया संशोधन स्वीकृत हुआ, अन्य अस्वीकृत हुए। यथा संशोधित अनुच्छेद 90 संविधान में जोड़ा गया) ]

कारों की संख्या तख्तियों पर हिन्दी अंक

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