अनुच्छेद 92 - Page 160

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पंडित बाल कृष्ण शर्माः मैंने उनसे हमेशा यही अनुरोध किया है कि दिल्ली प्रान्त चारों ओर से ऐसे प्रान्तों से घिरा हुआ है जिन्होंने हिन्दी को अपनी राजभाषा और देवनागरी लिपि को अपनी लिपि घोषित किया है।

माननीय सभापति ः शान्ति, शान्ति। आप मुझे जो सूचना देना चाहते हैं, वह मुझे पता है। जैसा कि मैंने कहा है, माननीय सदस्य विशेषाधिकार के प्रश्न पर निर्णय देने के लिए मुझ पर जोर न डालें। ऐसा करना शायद उनके हित में नहीं होगा। यह मामला सरकार को भेज दिया जायेगा।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बम्बई जनरल) ः विधि का उल्लंघन करने का कोई विशेषाधिकार नहीं है।

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अनुच्छेद 92

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः श्रीमान्, मैं प्रस्ताव करता हूँः

  1. ‘‘कि अनुच्छेद 92 के खण्ड (3) के उप-खण्ड (ख) में ‘आय’ के स्थान

पर ‘वेतन’ शब्द रख दिया जाये।’’

यह वही शब्द है जिसका हम प्रायः प्रयोग करते हैं।

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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमान मैं प्रस्ताव करता हूँः

  1. ‘‘कि अनुच्छेद 92 के खण्ड (2) के उप-खण्ड (क) और (ख) में ‘भारत

के राजस्व के स्थान पर ‘भारत की संचित निधि’ शब्द रखे जायें।’’

  1. ‘‘कि अनुच्छेद 92 के खण्ड (3) में ‘भारत के राजस्व’ के स्थान पर ‘भारत

की संचित निधि’ शब्द रखे जायें।’’

  1. ‘‘कि अनुच्छेद 92 के खण्ड (3) के उप खण्ड (घ) के पश्चात् निम्नलिखित

उप खण्ड रखे जायेंः

‘‘को देय वेतन भत्ता और पेंशन अथवा भारत के नियंत्रक और लेखा महापरीक्षक के संबंध में’’

9 के विषय में मुझे इतना ही कहना है कि सदन ने अनुच्छेद 124 खण्ड (5) पहले पारित कर दिया है, जिसमें विद्यमान संशोधन निहित है। अतः इसे यहाँ रखा गया है, क्योंकि यह अनुमान किया गया कि भारत की संचित निधि पर समस्त मदों को एकत्र कर देना अच्छा रहेगा, इसकी बजाय कि वे संविधान में यत्र-तत्र बिखरी रहें।