अनुच्छेद 95 - Page 165

146 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

निधि में से ऐसे व्यय अथवा ऐसी मांग के बारे में अनुदान की पूर्ति के लिए धनों का विनियोजन प्राधिकृत करने के लिये बनाई जाने वाली किसी विधि के सम्बन्ध में भी, अनुच्छेद 112, 113 और 114 के उपबन्ध वैसे ही प्रभावी होंगे जैसे कि वे वार्षिक वित्त विवरण तथा उसमें वर्णित व्यय अथवा अनुदान की किसी मांग तथा भारत की संचित निधि में से ऐसे किसी व्यय या मांग से सम्बन्धित अनुदान की पूर्ति के लिये धनों का विनियोग प्राधिकृत करने के लिये बनाई जाने वाली विधि के सम्बन्ध में प्रभावी है।’’

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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः मैं देखता हूँ कि सदन के समक्ष जो वित्तीय प्रस्ताव रखे गये हैं, उनसे सदस्य बहुत चिन्तित हैं। मैं इसे समझता हूँ, क्योंकि मुझे स्मरण है कि जब श्री चर्चिल के पिता लार्ड चांसलर बने थे, तब उनके समक्ष बजट रखा गया था जिसमें अंकों को दशमलव तथा उनके बिन्दुओं के साथ दिखाया गया था। स्पष्टतः वे गणित के विद्यार्थी नहीं थे, और समझ नहीं सके कि अंकों के बीच में उन दशमलव बिन्दुओं का क्या अर्थ था। अतः उन्होंने फाइल पर लिख दिया ‘‘इन बिन्दुओं का क्या आशय है?’’ यह स्पष्टीकरण वित्त विभाग के सचिव से मांगा गया। श्री चर्चिल के पिता जैसे प्रतिष्ठित व्यक्ति को भी समझने में कठिनाई हुई थी, इस बात को ध्यान में रखते हुए मुझे जरा भी आश्चर्य नहीं है यदि इस सदन के सदस्यों को इन उपबन्धों के समझने में ऐसी ही कठिनाई हो। इसलिये मैं सदन को ठीक तरह समझाने के लिये प्रारंभिक सिद्धांतों की व्याख्या करना चाहता हूँ।

श्रीमान्, मैं सदन को अनुच्छेद 92, अनुच्छेद 93 (2) और अनुच्छेद 94 के उपबन्धों का प्रभाव बताना चाहता हूँ। अनुच्छेद 92 राष्ट्रपति का यह कर्तव्य नियत करता है कि वह वर्ष के लिये एक वित्तीय विवरण संसद के समक्ष पेश करे-मैं ‘वर्ष के लिये’ इन शब्दों पर जोर देना चाहता हूँ-जिसमें कुछ श्रेणियों के व्यय दिखाये जाते हैं, जो भारत के राजस्वों पर भारित हों और जो भारत के राजस्वों पर भारित न हों। ऐसा करने के पश्चात् अनुच्छेद 93 (2) पर अमल होता है जिसमें लिखा है कि उन प्राक्कलनों पर कार्यवाही कैसे होगी। उसमें उल्लिखित है कि प्राक्कलन सदन में अनुदान के रूप में पेश किए जायेंगे। और उन पर लोकसभा में मतदान होगा। इन कार्यों के होने के बाद अनुच्छेद 94 प्रवर्तन में आ जाता है, नये अनुच्छेद 94 में उल्लिखित है कि लोकसभा में पेश किये गये सब अनुदान विनियोजन अधिनियम के रूप में रखे जायेंगे तथा विनियमित होंगे। अब मैं चाहता हूँ कि सदस्य इस पर विचार करें कि अनुच्छेद 92, 93 (2) और 94 का क्या प्रभाव है। फर्ज किया हम कोई और अनुच्छेद नहीं बनाते, तो क्या प्रभाव होगा? मेरे विवेकानुसार अनुच्छेद 92, 93 (2) और 94 में समाविष्ट उपबन्धों का प्रभाव यह होगा कि राष्ट्रपति वर्ष के मध्य में संसद में अन्य प्राक्कलन पेश नहीं कर सकेगा।