अनुच्छेद 95 - Page 167

148 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जाये। अतएव, विनियोजन अधिनियम का उल्लंघन किये बिना भी कार्यपालिका के लिये सर्वथा संभव होगा कि वह ससंद द्वारा मतदान से स्वीकृत धन से अधिक व्यय कर सके और उस राशि का आकस्मिता निधि या किसी अन्य निधि से निकाल सके। इसलिये अधिनियम का उल्लंघन तो हो ही गया, और ऐसा होना संभव है, क्योंकि कार्यपालिका किसी आपात में यह सोच सकती है कि ऐसा करना चाहिये और उनके लिये ऐसा करने के लिये निधि का भी उपबन्ध है। अतः प्रश्न यह हैः जब ऐसा कार्य हो जाये, तो क्या आप उस कार्य के विनियमन के लिए उपबन्ध नहीं करेंगे? वास्तव में, यदि मैं कह दूँ तो, अनुदान का पारित होना तो केवल ऐसा ही है कि जैसे संसद कोई अधिनियम पारित करे सरकार के कुछ अधिकारियों को, जिन्होंने कि नेकनियती से कोई ऐसा कार्य किया जो कि उस समय विधि के विपरीत हो, विषमुक्त कर दे। अधिकाई अनुदान के विचार में कोई और बात नहीं है, और मैं सदन के सदस्यों के समक्ष ‘हाउस ऑफ कामन्स के सार्वजनिक कार्य की प्रक्रिया की संहिता’ के पैरा 230 को पढ़ कर सुनाना चाहता हंँ। पैरा 230 में यही लिखा हैः

‘‘अतिरिक्त अनुदान की आवश्यकता तब पड़ती है, जबकि कोई विभाग असैनिक

आकस्मिकता निधि अथवा ट्रेजरी बैस्ट निधि में से अथवा अन्य प्राप्तियों में से अग्रिम

लेकर अथवा अन्यथा किसी प्रकार कोई धन किसी सेवा पर व्यय कर दे, जो कि

उस वर्ष में उस सेवा के लिये स्वीकृत राशि से अधिक हो।’’

इसलिये इसमें कोई विचित्रता नहीं है। केवल यही बात है कि जब कोई अनुपूरक प्राक्कलन होता है, तब अतिरिक्त व्यय किये बिना ही मंजूरी प्राप्त कर ली जाती है। अतिरिक्त अनुदान के बारे में अतिरिक्त व्यय पहले ही हो चुकता है और कार्यपालिका उस व्यय की मंजूरी के लिये संसद के पास आती है। अतः मेरे विचार में कोई कठिनाई तो है ही नहीं, वरन् इसकी आवश्यकता तब तक है, जब तक कि आप इतना उपबन्ध करने के लिये तैयार न हों जब भी कोई कार्यपालिका अधिकारी विनियोजन अधिनियम द्वारा स्वीकृत धन के अतिरिक्त कोई धन व्यय करता है, तो उसे अपराधी समझा जायेगा और उस पर मुकद्दमा चलाया जाएगा, तब तक आपको अतिरिक्त अनुदान की इस प्रक्रिया को स्वीकार करना होगा।

माननीय श्री के. सन्थानमः क्या मैं पूछ सकता हूँ कि क्या नये अनुच्छेद 95 (2) में उल्लिखित विधि के उपबन्धों के अधीन पिछले तीन अनुच्छेद प्रभावी होंगे? क्या इसका यह अर्थ है कि प्रत्येक अनुपूरक अनुदान के पश्चात् एक अनुपूरक विनियोजन अधिनियम पेश किया जायेगा?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः हाँ, यही तो होगा।

माननीय श्री के. सन्थानमः विनियोजन समस्त वर्ष के लिये नहीं होगा?