150 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के उपबन्ध वैसे ही प्रभावी होंगे जैसे कि वे वार्षिक वित्त विवरण में वर्णित
किसी व्यय के बारे में किसी अनुदान के करने के तथा भारत की संचित
निधि में से ऐसे व्यय की पूर्ति के लिये धनों का विनियोजन प्राधिकृत करने
के लिये बनाये जाने वाली विधि के सम्बन्ध में प्रभावी हैं।’’
(संशोधन संख्या 1720 पेश नहीं किया गया।)
माननीय श्री के. सन्थानम् ः श्रीमान्, मैं व्यापक सिद्धांत का विषय फिर नहीं उठाना चाहता, क्योंकि वह स्वीकृत हो चुका है किन्तु मैं यह कहना चाहता हूँ कि इस अनुच्छेद की रचना कुछ त्रुटिमय है।
उदाहरणार्थ, खंड (1) में लिखा है, ‘‘लोकसभा को शक्ति होगी’’, और इसके पश्चात् उप-खंड (ग) में लिखा है, ‘‘और विधि द्वारा प्राधिकृत करने की.....’’ मेरे विचार में संविधान के अनुसार, लोकसभा विधि द्वारा प्राधिकृत नहीं कर सकती।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः श्रीमान्, मैं कहना चाहता हूँ कि मसौदा समिति उप-खंड (ग) के बाद की तीन पंक्तियों की भाषा को बाद में बदलने की स्वतंत्रता चाहती है।
माननीय श्री के. सन्थानम्ः श्रीमान्, मैं इस बात को समझ नहीं पाया। सदन में हम ऐसी चीज पारित कर दें जो कि स्पष्टतः गलत है और संविधान के विपरीत है और फिर मसौदा समिति पर उसे छोड़ दें। मैं नही समझता कि हम जो उपबन्ध बना रहे हैं, उनको छेड़ने की आजादी हम मसौदा समिति को दे सकते हैं, जब तक कि कोई भूल-चूक न हो। हम नहीं चाहते कि हमारे समक्ष बिल्कुल एक नया संविधान रख दिया जाये और हम उसके प्रत्येक अनुच्छेद को पुनः देखने का कष्ट करें। मैं नहीं समझता कि स्पष्टतः गलत खंड को पारित कर देना सदन के लिये ठीक होगा। या तो उन्हें यह कहना चाहिये कि संसद को शक्ति होगी....
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं, अभी इस संशोधन को स्वीकार करने के लिये तैयार हूँ आप उसका सुझाव पेश कर सकते हैं। ‘‘संसद को विधि द्वारा प्राधिकृत करने की शक्ति होगी....’’
माननीय के. सन्थानम्ः श्रीमान, संशोधन इस प्रकार हो सकता है ‘‘और संसद के पास भारत की संचित निधि से उस धन को, जिस प्रयोजन के लिये अनुदान दिया गया है, निकालने के लिए विधि द्वारा प्राधिकृत करने की शक्ति होगी।’’
खण्ड (2) को लेते हैं, तो उसमें लिखा है ‘‘कि इस संविधान के अनुच्छेद 93 और 94 के उपबन्धों का प्रभाव किसी अनुदान देने के संबंध में बना रहेगा....’’ मैं जानना चाहता हूँ कि क्या इसका यह मतलब है कि इसके लिये विनियोजन अधिनियम रखना होगा और उस विनियोजन अधिनियम में समस्त विभाग दिखाये जायेंगे, भारित और अभारित, मतदान योग्य और