अनुच्छेद 97 - Page 171

152 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पहले कह चुका हूँ, इनमें कोई अन्तर नहीं है। विनियोजन अधिनियम में विस्तृत विवरण होता है, और संचित निधि में नहीं होता।

माननीय श्री के. सन्थानम् ः मैं नहीं समझता कि डॉ. अम्बेडकर के स्पष्टीकरण का मूल्य किसी अनुच्छेद के उपबन्धों से भी बढ़ सकता है। अनुच्छेद के वर्तमान रूप से तो यही प्रकट है कि अनुच्छेद 93 और 94 के समस्त उपबन्ध इस संचित निधि पर तथा अन्य पर भी लागू होंगे। अतः बजट की समस्त प्रक्रिया को दोहराना होगा।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः यदि माननीय सदस्य उप-खंड (2) को ध्यान से पढ़ेंगे तो उन्हें पता लग जायेगा कि उसमें किस उप-खंड की चर्चा है। उसमें लिखा है ‘‘इस संविधान के अनुच्छेदों 93 और 94 के उपबंधों का प्रभाव खण्ड (1) के अन्तर्गत दिए जाने वाले किसी भी अनुदान के संबंध में बना रहेगा।’’

माननीय श्री के. सन्थानम्ः पढ़े जाइये।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः जैसा कि मैंने कहा था, राजस्व पर भारित सेवाओं में अनुदान का कोई प्रश्न ही नहीं है।

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* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, अब मैं कुछ और अधिक कहने की आवश्यकता नहीं समझता। मैं केवल एक संशोधन प्रस्तुत कर रहा हूँः

‘‘कि खण्ड (1) के उप-खण्ड (ग) के पश्चात् ‘और’ के बाद तथा ‘तक’ से पहले निम्नलिखित शब्द जोड़ दिए जाएंः

‘‘संसद के पास शक्ति होगी’’ः

[ (डॉ. अम्बेडकर के पूर्ववर्ती प्रस्ताव के साथ संशोधन स्वीकृत हुआ। संशोधित रूप में अनुच्छेद 96 संविधान में जोड़ा गया।) ]

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अनुच्छेद 97

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः मैं नहीं समझता कि कोई उत्तर आवश्यक है, किन्तु श्रीमान्, आपकी अनुमति से मैं स्वयं एक संशोधन पेश करना चाहता हूँ। मैं प्रस्ताव करता हूँः

‘‘कि संशोधन सूची के संशोधन संख्या 1723 के निदेश से, अनुच्छेद 97 के खंड (3) में ‘भारत के राजस्व’ इन शब्दों के स्थान पर ‘भारत की संचित निधि’ ये शब्द

* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 10 जनवरी, 1949, पृ. 774