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रख दिये जायें।’’
श्री एच.वी. कामत ः खंड के अन्त के शब्द को व्यर्थ दोहराया गया है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः मेरा ऐसा ख्याल नहीं है।
* * * * *
माननीय सभापतिः अब मैं डॉ. अम्बेडकर के संशोधन पर मत लेता हूँ।
प्रश्न यह हैः
‘‘कि संशोधन-सूची के संशोधन संख्या 1723 के निदेश से अनुच्छेद 97 के खंड
(3) में ‘भारत के राजस्व’ इन शब्दों के स्थान पर ‘भारत की संचित निधि’ ये
शब्द रख दिये जायें।’’
[ (संशोधन स्वीकृत हुआ। संशोधित रूप में अनुच्छेद 97 संविधान में जोड़ा गया।) ]
* * * * *
अनुच्छेद 98
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः मैं तो केवल यही कह सकता हूँ कि मैं श्री जसपतराय कपूर के संशोधन को स्वीकार नहीं कर सकता। यह अधिक अच्छा है कि इस मामले को नियमों द्वारा उपबन्धित होने के लिये ढीला ही छोड़ दिया जाये। श्री कामत के संशोधन के संबंध में, मैं निःसंदेह उसकी ओर आकृष्ट अनुभव करता हूँ। किन्तु इस समय मैं वचन नहीं दे सकता, किन्तु मैं उन्हें आश्वासन दे सकता हूँ कि मसौदा समिति इस मामले पर विचार करेगी।
माननीय सभापति ः तो फिर मैं श्री कामत के संशोधन पर मत नहीं लूँगा। मैं इसे रचना संबंधी संशोधन समझता हूँ जिस पर मसौदा समिति विचार करेगी।
श्री जसपतराय कपूर के संशोधन संख्या 15 के संबंध में मैं डॉ. अम्बेडकर का ध्यान एक बात की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ। अनुच्छेद 98 के खंड (2) में निम्न शब्द हैंः
‘‘भारत डोमिनियन के विधानमंडल के बारे में।’’
दूसरे स्थान पर हमने ‘भारत की संविधान सभा’ ये शब्द रखे हैं। मेरे ख्याल में डॉ. अम्बेडकर यहाँ भी वहीं पद रखना पसंद करेंगे।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हाँ।
माननीय सभापति ः मैं कह रहा था कि यहां इस खंड (2) में ‘भारत डोमिनियन