नवीन अनुच्छेद 98-क - Page 173

154 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

का विधान-मंडल ये पद है। शायद ‘भारत की संविधान-सभा’ ये पद अच्छा रहेगा?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अब हमारे यहां दो सभायें हैं। संविधान सभा, जो संविधान सभा के रूप में बैठती है और एक संविधान सभा जो विधानमंडल के रूप में बैठती है। दोनों के लिये हमारे यहाँ नियम हैं। अतः मेरे विचार में ‘भारत डोमिनियन’ इन शब्दों को ही रहने देना अभीष्ट होगा, जिससे कि हम उन नियमों को स्वीकार कर सकें जो कि दूसरी सभा में लागू हैं।

श्री जसपतराय कपूर ः मेरा निवेदन यह है कि ‘भारत डोमिनियन के विधानमंडल’ के स्थान पर हम ‘संविधान-सभा’ रखकर कोष्टक में ‘विधायी’ शब्द रख सकते हैं। इसी नाम से हम अपनी संविधान-सभा को पुकारते हैं, जब कि वह विधान-मंडल’ के रूप में कार्य करती है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हमें भारत स्वतंत्रता अधिनियम की भाषा का प्रयोग करना है। हमें उस अधिनियम की शब्दावली तक ही निबंधित रहना है।

माननीय सभापति ः यदि इससे कोई कठिनाई नहीं होगी, तो मैं इसका ख्याल नहीं करता। मैं श्री जसपतराय कपूर के संशोधन पर मत लूंगा।

श्री जसपतराय कपूर ः श्रीमान्, मैं इसे वापस लेने के लिये सदन की अनुमति चाहता हूँ। मैं नहीं चाहता कि यह पराजित संशोधन बने।

माननीय सभापति ः यदि सभा उन्हें अपना संशोधन वापस लेने की अनुमति दे तो वे वापस ले सकते हैं।

[ (सभा की अनुमति से संशोधन वापस ले लिया गया। अनुच्छेद 98 संविधान में जोड़ा गया। ]

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नवीन अनुच्छेद 98-क

माननीय सभापति ः डॉ. अम्बेडकर ने नया अनुच्छेद रखने के संशोधन की सूचना दी है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं प्रस्ताव करता हूँः

‘‘कि अनुच्छेद 98 के पश्चात् निम्न नया अनुच्छेद जोड़ दिया जायेः

संसद में वित्तीय कार्य संबंधी प्रक्रिया का विधि द्वारा विनियमन

‘98-क. वित्तीय कार्य को समय के अन्दर समाप्त करने के प्रयोजन से संसद विधि द्वारा किसी वित्तीय विषय से अथवा भारत की संचित निधि में से धन का विनियोजन करने वाले किसी विधेयक से संबंधित संसद के प्रत्येक सदन की प्रक्रिया