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और कार्य संचालन का विनियमन कर सकेगी, तथा यदि, और जहाँ तक, इस प्रकार बनाई हुई किसी विधि का उपबन्ध पिछले अनुच्छेद के खंड (1) के अधीन संसद के किसी सदन द्वारा बनाये गये नियम से अथवा उस अनुच्छेद के खंड (2) के अधीन संसद के संबंध में प्रभावी किसी नियम या स्थायी आदेश से असंगत है, तो ऐसा उपबन्ध अभिभावी होगा।’’
माननीय सभापति ः इस संशोधन पर कोई सदस्य बोलना नहीं चाहता, अतः मैं प्रस्ताव पर मत लेता हूँ।
[ (प्रस्ताव स्वीकृत हो गया। अनुच्छेद 98-क संविधान में जोड़ा गया।) ]
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अनुच्छेद 173
माननीय सभापति ः डॉ. अम्बेडकर अगला संशोधन संख्या 2464 प्रस्तुत कर सकते हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः
‘‘कि अनुच्छेद 173 के खण्ड (4) में ‘‘पारित माना जाये’’ इन शब्दों के पश्चात् ‘‘जिस रूप में दोनों सदनों ने इसे पारित किया था’’ शब्द प्रविष्ट कर दिए जायें।’’
[ (डॉ. अम्बेडकर का संशोधन स्वीकृत हुआ। संशोधित रूप में अनुच्छेद 173 संविधान में जोड़ा गया।) ]
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अनुच्छेद 174
माननीय सभापतिः डॉ. अम्बेडकर, आपके नाम से दो संशोधन हैं, सूची 1 के संख्या 69 और 70 उनका उद्देश्य केवल यही है कि इस अनुच्छेद को उन उपबन्धों के समान बना दिया जाये, जिन्हें हम स्वीकार कर चुके हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमान्, मैं प्रस्ताव करता हूँः
‘‘कि अनुच्छेद 174 के खंड (1) के उप-खण्ड (ग) और (घ) के स्थान पर
निम्न उपखंड रख दिये जायेंः
(ग) राज्य की संचित निधि अथवा आकस्मिकता निधि की अभिरक्षा, ऐसी किसी
निधि में धन डालना अथवा उसमें से धन निकालना_
(घ) राज्य की संचित निधि में से धन का विनियोजन_