156 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
और भी
‘‘कि अनुच्छेद 174 के खण्ड (1) के उप-खण्ड (ड.) और (च) में ‘‘राज्य का राजस्व’’ इन शब्दों के स्थान पर ‘‘भारत की संचित निधि’’ शब्द रख दिये जायें।’’
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माननीय सभापतिः इस अनुच्छेद पर कोई और संशोधन नहीं है। अब मैं इस पर मत लूँगा।
श्री एच.वी. कामत ः क्या डॉ. अम्बेडकर इस विषय में कुछ नहीं कहना चाहते?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः मैं तो केवल यही कह सकता हूँ कि जब हम संविधान का पुनरीक्षण करेंगे तब मैं इस पर विचार कर लूंगा।
[ (डॉ. अम्बेडकर का संशोधन स्वीकृत हो गया।) ]
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श्री एच.वी. कामत ः क्योंकि डॉ. अम्बेडकरर ने इस पर विचार करने का वचन दिया है, अतः मैं इसे उनकी बुद्धिमत्ता पर छोड़ देता हूँ। वे बाद में उसका प्रयोग कर सकते हैं।
माननीय सभापति ः दोनों संशोधन?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः केवल एक ही संशोधन है।
श्री एच.वी. कामत ः क्या मैं पूछ सकता हूँ कि उन्होंने किस संशोधन पर विचार करने का वचन दिया है? शायद वे इसे स्पष्ट कर देंगे।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः संख्या 2466।
माननीय सभापति ः ठीक है, फिर मैं उन पर मत नहीं लूँगा।
[ (संशोधित रूप में अनुच्छेद 174 संविधान में जोड़ा गया।) ]
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माननीय डॉ.बी.आर. अम्बेडकरः मैं चाहता हूँ कि अनुच्छेद 175 स्थगित रहे।
श्री टी.टी. कृष्णमाचारी ः मेरा सुझाव है कि अनुच्छेद 175 और 176 को अभी रोक लिया जाये, क्योंकि वे ऐसी समस्याओं पर प्रभाव डालते हैं जिन पर मसौदा समिति अभी विचार कर रही है। संशोधन 177 को ले लिया जाए।
माननीय सभापति ः तो फिर हम अनुच्छेद 177 को लेंगे।