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अनुच्छेद 177
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमान्, मैं प्रस्ताव करता हूँः
‘‘कि अनुच्छेद 177 के खण्ड (2) के उपखण्ड (क) और (ख) के स्थान पर ‘‘राज्य का राजस्व’’ शब्दों के स्थान पर ‘‘राज्य की संचित निधि’’ शब्द रख दिये जायें।’’
मैं प्रस्ताव करता हूँः
‘‘कि अनुच्छेद 177 के खण्ड (3) ‘‘प्रत्येक राज्य का राजस्व’’ शब्दों के स्थान पर
‘‘प्रत्येक राज्य की संचित निधि’’ शब्द रख दिये जायें।’’
श्रीमान्, मैं यह भी प्रस्ताव करता हूँः
‘‘कि अनुच्छेद 177 के खण्ड (3) के उप-खण्ड (ख) में परिलब्धियाँ शब्द के
स्थान पर ‘‘वेतन’’ शब्द रख दिया जाये।’’
[ (डॉ. अम्बेडकर के सभी संशोधन स्वीकृत हुए।) ]
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अनुच्छेद 178
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः श्रीमान्, मैं प्रस्ताव करता हूँः
‘‘कि अनुच्छेद 178 के खण्ड (1) में ‘‘राज्य का राजस्व’’ शब्दों के स्थान पर
‘‘राज्य की संचित निधि’’ शब्द रख दिये जायें।
(संशोधन संख्या 2490 पेश नहीं किया गया।)
माननीय सभापति ः प्रश्न यह हैः
‘‘कि अनुच्छेद 178 के खण्ड (1) में ‘‘राज्य का राजस्व’’ शब्दों के स्थान पर ‘‘राज्य की संचित निधि’’ शब्द रख दिये जायें।’’
(संशोधन स्वीकृत हो गया)
माननीय सभापति ः प्रश्न यह हैः
‘‘कि संशोधित रूप में अनुच्छेद 178 संविधान का अंग बने।’’
[ (प्रस्ताव स्वीकृत हो गया। संशोधित रूप में अनुच्छेद 178 संविधान में जोड़ दिया गया।) ]
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* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 10 जून, 1949, पृ. 784
+ पूर्वोक्त पृष्ठ 784
++ पूर्वोक्त पृष्ठ 785-86
# पूर्वोक्त पृष्ठ 785-86