158 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अनुच्छेद 179
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः श्रीमान्, मैं प्रस्ताव करता हूँः
‘‘कि अनुच्छेद 179 के स्थान पर निम्न अनुच्छेद रख दिया जायेः
विनियोजन बिल 179, (1) विधान सभा अनुच्छेद 203 के अधीन अनुदान किये जाने के बाद यथासंभव शीघ्र राज्य की संचित निधि में से-
(क) सभा द्वारा इस प्रकार किये गये अनुदानों की तथा
(ख) राज्य की संचित निधि पर भारित किंतु सदनया सदनों के समक्ष पहले रखे
गये विवरण में दी हुई राशि से किसी भी अवस्था में अनधिक व्यय की_
पूर्ति के लिये अपेक्षित सब धनों के विनियोजन के लिये विधेयक पुरःस्थापित
किया जायेगा।
(2) इस प्रकार किये गये किसी अनुदान की राशि में फेरबदल करने अथवा
अनुदान के लक्ष्य को बदलने अथवा राज्य की संचित निधि पर भारित व्यय
की राशि में फेरबदल करने का प्रभाव रखने वाला कोई संशोधन ऐसे किसी
विधेयक पर राज्य के विधानमंडल के सदन में या किसी सदन में प्रस्थापित
नहीं किया जायेगा तथा कोई संशोधन इस खंड के अधीन अप्रवेश्य है या
नहीं, इस बारे में पीठासीन व्यक्ति का विनिश्चय अन्तिम होगा।
(3) अगले दो अनुच्छेदों के उपबन्धों के अधीन रहते हुए राज्य की संचित निधि
में से इस अनुच्छेद के उपबन्धों के अनुसार पारित विधि द्वारा किये गये
विनियोजन के अधीन निकालने के अतिरिक्त और कोई धन नहीं निकाला
जायेगा।’’
माननीय सभापति ः इस अनुच्छेद पर कोई और संशोधन नहीं है।
[ (प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। यथासंशोधित रूप में अनुच्छेद 179 संविधान में जोड़ा गया।) ]
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अनुच्छेद 180
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमान्, मैं प्रस्ताव करता हूँः
‘‘कि अनुच्छेद 180 के स्थान पर निम्न अनुच्छेद 180 (1) में रख दिया जायेः (क) अनुच्छेद 179 के उपबन्धों के अनुसार निर्मित किसी विधि द्वारा किसी विशेष
सेवा पर चालू वित्तीय वर्ष के वास्ते व्यय किये जाने के लिये अनुपूरक, अपर या प्राधिकृत कोई राशि उस वर्ष के प्रयोजन के लिए अपर्याप्त पाई अतिरिक्त अनुदान जाती है अथवा उस वर्ष के आर्थिक वित्त विवरण में अपेक्षित