159
न की गई किसी नई सेवा पर अनुपूरक अथवा अपर व्यय की चालू वित्तीय वर्ष
में आवश्यकता पैदा हो गई है_ अथवा
(ख) किसी वित्तीय वर्ष में किसी सेवा पर, उस सेवा और उस वर्ष के लिये अनुदान
की गई राशि से अधिक कोई धन व्यय हो गया है, तो राज्यपाल यथास्थिति राज्य
के विधानमण्डल के सदन अथवा सदनों के समक्ष उस व्यय की प्राक्कलित की
गई राशि को दिखाने वाला दूसरा विवरण रखवायेगा अथवा यथास्थिति राज्य की
विधानसभा में ऐसी अतिरिक्त कर के लिए मांग उपस्थित करायेगा।
(2) ऐसे किसी विवरण और व्यय या मांग के संबंध में, तथा राज्य की संचित निधि में से ऐसे व्यय अथवा ऐसी मांग से संबंधित अनुदान की पूर्ति के लिये धनों का विनियोजन प्राधिकृत करने के लिये बनाई जाने वाली किसी विधि के संबंध में भी, पिछले तीन अनुच्छेदों के उपबन्ध वैसे ही प्रभावी होंगे, जैसे कि वे वार्षिक वित्त विवरण तथा उसमें वर्णित व्यय अथवा अनुदान की किसी मांग तथा राज्य की संचित निधि में से ऐसे किसी व्यय या अनुदान की पूर्ति के लिये धनों का विनियोजन प्राधिकृत करने के लिये बनाई जाने वाली विधि के संबंध में प्रभावी है।’’
[ (संशोधन स्वीकृत हुआ। संशोधित रूप से अनुच्छेद 180 संविधान में जोड़ दिया गया।) ]
अनुच्छेद 181
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमान्, मैं प्रस्ताव करता हूँः
‘‘कि अनुच्छेद 181 के स्थान पर निम्न अनुच्छेद रख दिया जायेः
- (1) इस अध्याय के पूर्वगामी उपबन्धों में किसी बात के होते हुए भी किसी राज्य की विधानसभा को-
(क) किसी वित्तीय वर्ष के भाग के लिए प्राक्कलित व्यय के बारे में किसी अनुदान को,
उस अनुदान के लिए मतदान करने के लिये अनुच्छेद 203 लेखानुदान प्रत्ययानुदान में विहित प्रक्रिया की पूर्ति लम्बित रहने तक तथा उस व्यय और अपवादानुदान के संबंध में अनुच्छेद 204 के उपबन्धों के अनुसार विधि के
पारण के लम्बित रहने तक, पेशगी देने की_ (ख) जब कि किसी सेवा की महत्ता या अनिश्चित रूप के कारण मांग ऐसे ब्यौरे के
साथ वर्णित नहीं की जा सकती, जैसा की वार्षिक वित्त विवरण में साधारणतया
दिया जाता है, तब राज्य के सम्पत्ति स्रोतों पर अप्रत्याशित मांग की पूर्ति के लिये
अनुदान करने की_
(ग) किसी वित्तीय वर्ष की चालू सेवा का जो अनुदान भाग न हो ऐसा आप वादिक