160 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अनुदान करने की शक्ति होगी तथा उक्त अनुदान जिन प्रयोजनों के लिये किये गये
हैं उनके लिये राज्य की संचित निधि में से धन निकालना विधि द्वारा प्राधिकृत
करने की शक्ति राज्य के विधानमंडल की होगी।
(2) खण्ड (1) के अधीन किये जाने वाले किसी अनुदान तथा उस खण्ड के अधीन बनाई जाने वाली किसी विधि के संबंध में अनुच्छेद 178 और 179 के उपबन्ध वैसे ही प्रभावी होंगे, जैसे कि वे वार्षिक वित्त विवरण में वर्णित किसी व्यय के बारे में किसी अनुदान के करने के तथा राज्य की संचित निधि में से ऐसे व्यय की पूर्ति के लिये धनों का विनियोजन प्राधिकृत करने के लिये बनाई जाने वाली विधि के संबंध में प्रभावी है।’’
[ (संशोधन स्वीकृत हुआ। संशोधित रूप में अनुच्छेद संविधान में जोड़ा गया।) ]
अनुच्छेद 182
माननीय सभापतिः प्रस्ताव यह हैः
‘‘कि अनुच्छेद 182 संविधान का अंग बने।’’
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः श्रीमान्, आपकी अनुमति से मैं एक छोटा सा संशोधन पेश करना चाहता हूँ।
‘‘कि अनुच्छेद 182 में ‘‘राज्य का राजस्व’’ शब्दों के स्थान पर ‘‘भारत की संचित निधि’’ शब्द रख दिये जायें।’’
माननीय सभापति ः कोई और संशोधन नहीं है।
[ (प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। संशोधित रूप में अनुच्छेद 182 संविधान में जोड़ा गया।) ]
अनुच्छेद 183
माननीय सभापति ः क्या कोई और कुछ कहना चाहता है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ः मैं इस संशोधन को स्वीकार नहीं करता।
माननीय सभापति ः प्रश्न यह हैः
‘‘कि अनुच्छेद 183 के खण्ड (1) में ‘‘कर सकता है’’ शब्दों के स्थान पर ‘‘कौन करेगा’’ शब्द रख दिये जायें और अन्त में निम्न शब्द जोड़ दिये जायेंः-
‘‘विधानसभा के पहले सत्र की तारीख से छः महीने के भीतर’’
[ (श्री आर.के. सिधवा का संशोधन अस्वीकृत हो गया। अनुच्छेद 183 संविधान में जोड़ा गया।) ]
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