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नवीन अनुच्छेद 183-क
माननीय सभापतिः डॉ. अम्बेडकर का एक नया अनुच्छेद 183-क है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमान्, मैं प्रस्ताव करता हूँः
फ्कि अनुच्छेद 183 के पश्चात् निम्न नया अनुच्छेद जोड़ दिया जाएः- (क) वित्तीय कार्य को समय के अन्दर समाप्त करने के प्रयोजन से किसी राज्य का
विधानमंडल विधि द्वारा, किसी वित्तीय विषय से अथवा राज्य के विधानमंडल राज्य की संचित निधि में से धन का विनियोजन करने वाले में वित्तीय कार्य संबंधी किसी विधेयक से संबंधित राज्य के विधानमंडल के सदन प्रक्रिया का विधि द्वारा या सदनों की प्रक्रिया और कार्य-संचालन का विनियमन विनियमन कर सकेगा तथा यदि, और जहाँ तक इस प्रकार बनाई
हुई किसी विधि का कोई उपबंध अनुच्छेद 208 के खण्ड (1) के अधीन राज्य के विधानमंडल के सदन या किसी सदन द्वारा बनाए गए नियम से, अथवा उस अनुच्छेद के खण्ड (2) के अधीन राज्य के विधानमंडल के संबंध में प्रभावी किसी नियम या स्थायी आदेश से, असंगत है तो, और वहां तक, ऐसा उपबंध अभिभावी होगा।य्
अध्यक्षः क्या कोई और कुछ कहना चाहता है?
प्रश्न यह हैः
फ्कि नया अनुच्छेद 183-क संविधान में जोड़ दिया जाए।य्
(प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। अनुच्छेद 183-संविधान में जोड़ा गया।)
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अनुच्छेद 217
* माननीय सभापतिः मुझे कोई संशोधन दिखाई नहीं दिया है।
प्रो. शिब्बनलाल सक्सेनाः मैंने उसकी सूचना आज प्रातःकाल दी थी। मैं प्रस्ताव पेश करता हूँ ...
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बम्बईः जनरल)ः उनके संशोधन की प्रतियाँ हमें नहीं मिली हैं।
श्री एल. कृष्णास्वामी भारती (मद्रासः जनरल)ः हम यह नहीं समझ सकते हैं कि वे क्या पेश कर रहे हैं?
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 10 जनवरी, 1949, पृ. 788