अनुच्छेद 217 - Page 181

162 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय सभापतिः हमारे बैठने के कुछ मिनट पूर्व ही उन्होंने संशोधन की सूचना दी है। परन्तु मुझे कहा गया है कि वह न्यूनाधिक रूप में अक्षरशः वैसा ही है जैसा कि संशोधन संख्या 2741 है।

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+ प्रो. शिब्बनलाल सक्सेनाः श्रीमान्, मैं समझता हूँ कि ऐसे मौलिक महत्त्व के अनुच्छेदों को केवल इस आधार पर इस सभा में बिना ध्यान दिए नहीं आने देना चाहिए कि कुछ संशोधन जिनकी सदस्यों ने सूचना दी थी, वे पेश नहीं किए गए।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इस सम्बन्ध में मैं एक-दो बातें रखना चाहूँगा। यह कदाचित महत्त्वपूर्ण विषय प्रतीत होता है। सर्वप्रथम मैं यह जानना चाहता हूँ कि यह संशोधन है अथवा किसी संशोधन पर संशोधन है। यदि यह संशोधन पर संशोधन है तो इसको तब तक पेश नहीं किया जा सकता जब तक कि मूल संशोधन पेश न किया जाए।

माननीय सभापतिः यह संशोधन संख्या 2743 पर संशोधन है जिसको श्री नजरुद्दीन अहमद द्वारा पेश किया जा चुका है। माननीय सदस्य अपनी सूचना में कहते हैं कि उनका संशोधन संख्या 2741, 2742, 2743, 2744 और 2745 पर है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यदि इसको संशोधन संख्या 2743 पर संशोधन के रूप में माना जाता है तो यह स्पष्ट है कि चूंकि वह संशोधन संख्या 2743 के क्षेत्र से बहुत परे है इसको तब तक पेश नहीं किया जा सकता जब तक कि सदस्य आपको इस बात का संतोष न करा दें कि वह मूल संशोधन का सार रूप में परिवर्तन नहीं कर रहा है। जिस रूप में यह है, उस रूप में यह उस संशोधन की सही-सही पुनरावृत्ति है, जो सर्वश्री सन्थानम्, अनन्त शयनम आयंगर तथा अन्य सदस्यों के नाम से है।

श्री टी.टी. कृष्णमाचारी द्वारा बाद में रखे गए निम्नलिखित संशोधन स्वीकृत हो गएः

फ्कि अनुच्छेद 217 की धारा (2) में ‘भाग-एक’ शब्द और अंक के स्थान पर ‘भाग-तीन’ शब्द और अंक जोड़ दिया जाए।य्

(संशोधन स्वीकृत हुए, यथा संशोधित अनुच्छेद 217 संविधान में जोड़ा गया।)

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+ पूर्वोक्त पृष्ठ 789

++ पूर्वोक्त पृष्ठ 790