166 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
खंड (2) में फ्भाग 1 शब्द और संख्याय् के पश्चात् अथवा फ्भाग 3 शब्द और
संख्याय् प्रविष्ट की जाए।य्
* * * * *
* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमान्, मैं इस बात से सहमत हूँ कि श्रीमान पिल्लै के प्रश्न के लिए व्याख्या अपेक्षित है। यह व्याख्या यह है। मुझे विश्वास है कि वे इस बात से सहमत होंगे कि विरोध के संबंध में अनुच्छेद 231 में जिस नियम का उल्लेख किया गया है, उसका पालन केवल वहीं तक करना होगा, जहां तक कि संसद द्वारा निर्मित भावी विधि का संबंध है। वे देखेंगे कि अनुच्छेद 231 में फ्चाहे पहले अथवा बाद में पारितय् शब्द है। निस्संदेह इस संविधान के प्रारम्भ होने के पश्चात् संसद द्वारा निर्मित विधि के संबंध में विरोध के नियम का दोनों भाग 1 में के राज्यों और भाग 3 में उल्लिखित राज्यों द्वारा निर्मित विधियों के संबंध में समान रूप से प्रयुक्त होगा। संविधान के पारित होने से पूर्वकालीन निर्मित विधियों के संबंध में विरोध के प्रश्न की स्थिति यह है। जैसा कि मैंने कई बार इस सदन में कहा है कि यह हमारी इच्छा है और मुझे विश्वास है कि सदन की भी यही इच्छा है कि भाग 1 और 3 में के राज्यों में परस्पर कोई विशिष्ट भेद किए बिना समस्त राज्यों में संविधान के समस्त अनुच्छेदों को साधारणतया प्रयुक्त करना चाहिए। यह अच्छी बात नहीं है कि जब कभी आप कोई अनुच्छेद पारित करें तो भाग 3 में के राज्यों को कुछ बचत की सुविधा देने के लिए उस अनुच्छेद के साथ एक परन्तुक प्रविष्ट करें, यद्यपि इस बात में कोई संदेह नहीं है कि भाग 3 में के राज्यों द्वारा निर्मित विधियों के संबंध में कुछ बचत करनी होगी। जैसा कि मैंने कहा था, एक नए भाग अथवा एक नई अनुसूची में, जिसमें भाग 3 में के राज्यों के संबंध में रक्षण का अधिनियम बनाया जाएगा, इस कार्य का करना प्रस्थापित किया गया है, जिससे कि जहाँ तक इस संविधान से पूर्व की निर्मित विधियों के प्रवर्तन में आने का संबंध है, उनकी रक्षा उस विशेष प्रपत्र अथवा विशेष अनुसूची में किसी अधिनियमित प्रावधान द्वारा की जाएगी। इस विषय में मैं एक बात और कहना चाहूँगा, वह यह है कि यद्यपि भाग 3 में के राज्यों के लिए उस विशेष भाग में रक्षण देना प्रस्थापित किया गया है, फिर भी वह रक्षण अनन्य नहीं हो सकता क्योंकि उसमें दिए गए रक्षण का, कम से कम उस विशेष भाग में के कुछ उपबन्धों का अनुच्छेद 307 के अनुसार पालन किया जाएगा, जो राष्ट्रपति को अनुकूलन करने का अधिकार देता है। वह अनुकूलन भाग 1 में के तथा भाग 3 में के दोनों राज्यों में लागू होगा। अतः जहाँ तक संसद द्वारा अथवा भाग 3 में के राज्यों के विधानमंडलों द्वारा इस संविधान के प्रारम्भ के पूर्व निर्मित विधि का संबंध है, उनकी सर्वप्रथम अनुच्छेद 231 के प्रवर्तन से रक्षा की जाएगी, परन्तु वे अनुकूलन पर विचार करने वाले अनुच्छेद 307 के अधीन रहेगी।