अनुच्छेद 234 - Page 186

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[ (डॉ. अम्बेडकर का पूर्व उल्लिखित संशोधन स्वीकृत हुआ। संशोधित रूप में अनुच्छेद 231 संविधान में जोड़ा गया।) ]

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अनुच्छेद 232

माननीय सभापतिः हम अनुच्छेद 232 को लेते हैं।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमान्, मैं प्रस्ताव करता हूँः

फ्कि अनुच्छेद 232 के शीर्षक विधायी शक्तियों पर निर्बन्धन’ को निकाल दिया जाए।य्

आपकी अनुमति से मैं अपना नया संशोधन पेश करता हूँः

(1) कि ‘भाग 1 और शब्द संख्या’ के पश्चात् ‘अथवा भाग 3 शब्द और संख्या’ प्रविष्ट की जाएं, और

(2) अनुच्छेद 232 के खण्ड (क) के पश्चात् निम्न खण्ड प्रविष्ट किया जाएः

¹(कक) जहां शासक की सिफारिश अपेक्षित थी, वहां शासक या राष्ट्रपति नेह्

श्रीमान्, मैं यह समझ गया हूँ कि ‘शासक’ शब्द के प्रयोग पर कुछ भावुक आपत्ति है। मैं इस भावुकता को स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ और इस कारण मैं यह प्रस्थापित करना चाहता हूँ कि सदन इस संशोधन को इस समय स्वीकार कर ले और ‘शासक’ शब्द के स्थान में कोई दूसरा अच्छा शब्द खोजने के कार्य को मसौदा-समिति पर छोड़ दिया जाए। अन्यथा केवल उसी कारण के आधार पर कि इस समय हम ‘शासक’ शब्द के स्थान में कोई अधिक उपयुक्त शब्द नहीं खोज सकते हैं, इस पूरे के पूरे अनुच्छेद को व्यर्थ ही स्थगित रखना पड़ेगा।

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अनुच्छेद 234

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमान्, मैं प्रस्ताव करता हूँः

फ्कि अनुच्छेद 234 में निम्न नवीन खण्ड प्रविष्ट किया जाएः

¹(3) जहाँ इस अनुच्छेद के पूर्ववर्ती खण्ड के अधीन संचार साधनों के निर्माण

अथवा उनको बनाए रखने के बारे में, किसी राज्य को दिए गए किसी निदेश

के पालन में उससे अधिक खर्च होता है जो, यदि ऐसा निदेश नहीं दिया गया

* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 13 जून, 1949, पृ. 811

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