170 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
विधि में उल्लिखित हों, अपील स्वीकार करने और सुनने की शक्तियां प्रदान करेगी।
अनुच्छेद 111-क
अध्यक्षः डॉ. अम्बेडकर अब अपना संशोधन पेश करेंगे।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बम्बईः जनरल)ः मैं यह प्रस्ताव प्रस्तुत करता हूँ, श्रीमानः
फ्कि सूची 1 (पांचवे सप्ताह) के संशोधन नं. 23 और 24 के संबंध में, नवीन
अनुच्छेद 111-क (1) भारत राज्य क्षेत्र के किसी उच्च न्यायालय द्वारा, दण्ड
कार्यवाही में दिए हुए किसी निर्णय, अन्तिम आदेश या दण्डादेश की उच्चतम
न्यायालय में अपील होगी यदि -
(क) उच्च न्यायालय ने अपील में किसी अभियुक्त व्यक्ति की विमुक्ति के आदेश
को उलट दिया है तथा उसको मृत्यु-दण्डादेश दिया है_ अथवा
(ख) उच्च न्यायालय ने अपने अधीन न्यायालय से किसी मामले को परीक्षण के
हेतु अपने पास मंगवा लिया है तथा ऐसे परीक्षण में अभियुक्त व्यक्ति को
दोषी-सिद्ध ठहराया है और मृत्यु-दण्डादेश दिया है_ अथवा
(ग) उच्च न्यायालय प्रमाणित करता है कि मामला उच्चतम न्यायालय में अपील
किए जाने लायक है।य्
परन्तु इस खण्ड के उपखण्ड (ग) के अधीन होने वाली अपील, ऐसे नियमों के अधीन रह कर जिन्हें कि उच्चतम न्यायालय समय-समय पर बनाए तथा ऐसी शर्तों के अधीन रहकर जो उच्च न्यायालय द्वारा स्थापित या अपेक्षित की जाए, ही होगी।
(2) संसद विधि द्वारा ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के अधीन, जो ऐसी विधि में उल्लिखित की जाएं, उच्चतम न्यायालय को भारत राज्य क्षेत्र के किसी उच्च न्यायालय की दण्ड कार्यवाही में दिए गए किसी निर्णय, अन्तिम आदेश अथवा दण्डादेश की अपील लेने और सुनने की और भी शक्ति दे सकेगी।य्
मैं इस समय कुछ नहीं कहना चाहता हूँ, परन्तु अपने नए संशोधन पर होने वाले वाद-विवाद को सुनने के बाद के लिए मैं अपने विचार सुरक्षित रखूँगा।
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* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 13 जून, 1949, पृ. 817
+ पूर्वोक्त पृष्ठ 817
++ पूर्वोक्त पृष्ठ 818