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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अध्यक्ष महोदय, चन्द बातें कहने के लिए मैं
खड़ा हो रहा हूँ ताकि सभा को इस बात का ठीक-ठीक पता चल जाए कि इस नवीन अनुच्छेद 111-क को किस लिए रखा जा रहा है। इस सम्बन्ध में पहली बात मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि अनुच्छेद 111-क को इस अभिप्राय से नहीं रखा जा रहा है कि उच्चतम न्यायालय को आपराधिक मामलों की सुनवाई का आम क्षेत्राधिकार दे दिया जाए जो क्षेत्राधिकार उसे इस अनुच्छेद द्वारा दिया जा रहा है, वह बड़ा ही सीमित है।
मैं उच्चतम न्यायालय को आपराधिक मामलों के सम्बन्ध में वह अपीलीय क्षेत्राधिकार जो कि अनुच्छेद 111-क के उप-खण्डों में उल्लिखित है, क्यों देना वांछनीय समझता हूँ, इसे समझने के लिए मैं उप-खण्ड (क), (ख) को उप-खण्ड (ग) से पृथक कर देना चाहता हूँ क्योंकि दोनों का प्रयोजन भिन्न है। जैसा कि सभा को मालूम है, उपखण्ड (क) और (ख) के अनुसार उच्चतम न्यायालय को अपीलीय क्षेत्राधिकार केवल उन्हीं मामलों में होगा, जहाँ मृत्यु दण्ड दिया गया हो और अन्य मामलों में नहीं। यह बात यहाँ ध्यान में रखनी होगी।
अब मैं संक्षेप में यह बताऊँगा कि उच्चतम न्यायालय को सीमित अपीलीय क्षेत्राधिकार देना क्यों आवश्यक है वह सिर्फ उन्हीं मामलों में जहाँ मृत्यु दण्ड दिया गया है, अपील की सुनवाई कर सकता है। सभा को यह मालूम होना चाहिए कि जहाँ तक कि अपने अपराध विषयक कानून-विज्ञान का सम्बन्ध है, जैसा कि दण्ड-प्रक्रिया-संहिता में दिया हुआ है, इस बात को एक सिद्धान्त के रूप में मान लिया गया है कि अगर अभियुक्त व्यक्ति को मृत्यु-दण्डादेश दिया जाता तो उसे उस दण्डादेश के विरुद्ध अगर ज्यादा नहीं तो कम से कम एक अपील का अधिकार मिलना ही चाहिए।
माननीय सभापतिः पर यहाँ मैं आपको एक बात बताऊंगा और वह यह कि आपके संशोधन के अन्दर ऐसा मामला नहीं आता है, जहाँ दण्डादेश को बढ़ाकर मृत्यु दण्डादेश दिया गया हो।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः बात यह है कि ऐसे मामलों को हम यहाँ नहीं रखना चाहते। उन मामलों में जहाँ दण्डादेश को बढ़ाकर मृत्यु दण्डादेश दिया गया है, उच्चतम न्यायालय को हम अपीलीय क्षेत्राधिकार नहीं देना चाहते हैं। हम ऐसा जानबूझकर कर रहे हैं। और सभा को भी सम्भवतः यह मालूम होगा। यह एक मानी हुई बात है कि जिस मामले में, अभियुक्त व्यक्ति को मृत्यु-दण्डादेश दिया गया है, वहाँ अभियुक्त को कम से कम उस दण्डादेश के विरुद्ध एक अपील का अधिकार मिलना ही चाहिए।
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 13 जून, 1949, पृ. 824
+ पूर्वोक्त, 14 जून, 1949, पृष्ठ 840
++ पूर्वोक्त 14 जून, 1949, पृष्ठ 853-57