अनुच्छेद 111-क - Page 191

172 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

यह बात एक सिद्धांत के रूप में मान ली गई है और इस सिद्धांत को देखते हुए तथा दण्ड-प्रक्रिया-संहिता के प्रावधानों पर गौर करते हुए हम यह देखते हैं कि यहां तीन तरह के मामलों में इस सिद्धान्त की अवहेलना की गई है या इसे अमल में नहीं लाया गया है। एक तो ऐसा मामला जिसमें जिला न्यायाधीश सेशन न्यायाधीश के रूप में प्रकार्य करते हुए अभियुक्त व्यक्ति को बरी कर देता है, पर हुकूमत अपने अपीलीय क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए अभियुक्त के विमुक्ति आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील करती है और उच्च न्यायालय अभियुक्त व्यक्ति को मृत्यु-दण्डादेश देता है। ऐसे मामले में अपील का अधिकार नहीं दिया गया है। उक्त सिद्धांत के सम्बन्ध में यहाँ एक अपवाद ही तो यह रखा गया है।

दूसरे मामले वे हैं, जिनमें कलकत्ता, बम्बई या मद्रास के उच्च न्यायालय के सेशन न्यायाधीश, सेशन-न्यायालय के रूप में बैठकर अभियुक्त व्यक्ति को बरी कर देते हैं पर हुकूमत जब विमुक्ति आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील करती है तो उच्च न्यायालय अपने अपीलीय क्षेत्राधिकार के अधीन उस मामले की सुनवाई करके अभियुक्त व्यक्ति को मृत्यु-दण्डादेश देता है। ऐसे मामलों के सम्बन्ध में भी अपील की व्यवस्था यहाँ नहीं रखी गई है।

श्री नजरुद्दीन अहमदः ऐसे मामलों में तो अपील का अधिकार है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः नहीं, ऐसे मामलों में अपील का अधिकार नहीं दिया गया है।

श्री नजरुद्दीन अहमदः दण्ड-प्रक्रिया-संहिता की धारा 411-क के अधीन ऐसे मामलों में अपील की जा सकती है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः धारा 411-क केवल कलकत्ता, बम्बई और मद्रास के उच्च न्यायालयों के सम्बन्ध में ही लागू होती है। और वहाँ भी सभी मामलों के सम्बन्ध में या ऐसे मामले के सम्बन्ध में लागू नहीं होती है, जहाँ उच्च न्यायालयों ने धारा 506 के अधीन सुनवाई की हो। धारा 411-क का दायरा केवल उन्हीं मामलों तक सीमित है जिन पर उच्च न्यायालय ने आरम्भिक न्यायालय के रूप में बैठकर निर्णय दिया है। ऐसे निर्णयों के विरुद्ध अपील की जा सकती है। इसलिए, श्रीमान्,

पण्डित लक्ष्मीकान्त मैत्राः धारा 526 में साधारण मामलों के एक न्यायालय से दूसरे न्यायालय में भेजे जाने के बारे में व्यवस्था है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः ऐसा मामला जो अधीन न्यायालय के उच्च न्यायालय के पास जाता है और वहाँ उसकी सुनवाई होती है, उसमें अपील का अधिकार नहीं दिया गया है। प्रस्तुत अनुच्छेद के द्वारा एक असाधारण क्षेत्राधिकार की व्यवस्था की