अनुच्छेद 167-क - Page 200

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167-क का खण्ड (3) है तो ठीक लेकिन यह उन्हीं स्थितियों तक सीमित रहना चाहिए जिनका उल्लेख उप-खण्ड (घ) में किया गया है। इसलिए आपकी अनुमति से, मैं

खण्ड (2) में यह संशोधन रखना चाहूँगाः

फ्गत पूर्ववर्ती अनुच्छेद के खण्ड (1) के उप-खण्ड (घ) में दी हुई अनर्हताओं को लेकर उठने वाले किसी प्रश्न पर विनिश्चय देने से पूर्व राज्यपाल निर्वाचन आयोग की राय लेगा तथा ऐसी राय के अनुसार ही कार्य करेगा।य्

माननीय सभापतिः श्री टी.टी. कृष्णामाचारी द्वारा प्रसारित संशोधन में, जैसा कि मैं समझ पाता हूँ, निर्वाचन के पहले या निर्वाचन काल में उत्पन्न होने वाली अनर्हता का प्रश्न नहीं रखा गया है। उसमें तो निर्वाचन के बाद विधानमण्डल का सदस्य हो जाने पर अगर कोई व्यक्ति किसी अनर्हता का भागी हो जाता है तो उसके सम्बन्ध में उठने वाले प्रश्न की बात कही गई है। ऐसे प्रश्नों का निपटारा निर्वाचन आयोग करेगा।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमान्! किसी अभ्यर्थी के विरुद्ध कोई याचिका ( petition ) आने पर आयोग उसकी जाँच करेगा और हो सकता है निर्वाचन काल में किए गए कुछ अपराधों के लिए वह अभ्यर्थी को दोषी पाए जाने पर इस बीच निर्वाचन समाप्त हो चुका होगा और अभ्यर्थी सदस्य के रूप में अपना स्थान ग्रहण कर चुका होगा।

माननीय सभापतिः क्या ऐसे मामलों को निपटाने का अधिकार निर्वाचन-आयोग को नहीं है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः है, पर होता यह है कि ज्यों ही कोई व्यक्ति निर्वाचित हो जाता है, उसे शपथ लेने और प्रतिज्ञान करने पर सभा में बैठने का अधिकार प्राप्त हो जाता है। वह सभा में बैठता है और बाद में उसका प्रतिद्वंद्वी अभ्यर्थी निर्वाचन के सम्बन्ध में याचिका (चमजपजपवद) दाखिल करता है और न्यायालय के इस निर्णय पर कि निर्वाचन कानून के अधीन वह कतिपय अपराधों का दोषी है, वह व्यक्ति अपने स्थान से हटा दिया जाता है। यह मामला भी उप-खण्ड (घ) के अन्दर आएगा। जब किसी व्यक्ति ने सदस्य के रूप में सभा में स्थान ग्रहण कर लिया है, उसके बाद....’

माननीय सभापतिः मुझे ऐसा मालूम होता है कि यहाँ दो तरह की अनर्हताओं का उल्लेख है। कोई सदस्य सदस्य होने के पूर्व या निर्वाचन काल में, किसी अनर्हता का भागी हो सकता है। ऐसे मामलों को निपटाने का अधिकार निर्वाचन न्यायाधिकरण होगा।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह तो इस बात पर निर्भर करता है कि आगे चलकर क्या प्रक्रिया इसके लिए निर्धारित करते हैं।

माननीय सभापतिः पर सभा में स्थान ग्रहण करने के बाद भी, हो सकता है कोई