182 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सदस्य किसी अनर्हता का भागी हो जाए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इसी का प्रावधान तो उप-खण्ड (घ) में किया गया है।
माननीय सभापतिः फिर अन्य अनर्हताएं भी किसी पर लागू हो सकती हैं। कोई व्यक्ति विकृत मस्तिष्क का हो सकता है या अनुन्मुक्त दिवालिया हो सकता है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इन सबका प्रावधान यहाँ किया गया है। यह सब अनर्हताएँ सदस्यों के लिए लागू होती हैं।
श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः कृपया संशोधन को पढि़ए तो।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अनर्हताएँ दो तरह की हैं। एक तो वह अनर्हताएँ हैं जो अभ्यर्थी के लिए लागू होती हैं। जिन लोगों पर यह अनर्हताएँ लागू होती हैं, वह निर्वाचन के लिए उम्मीदवार ही नहीं बन सकते। दूसरी अनर्हताएँ वह हैं जो सदस्यों के लिए लागू होती हैं। चुने जाने के बाद अगर कोई अनुच्छेद 167 में उल्लिखित अनर्हता का भागी हो जाता है, वह सभा में बैठ नहीं सकता। दोनों अनर्हताएँ भिन्न हैं। दोनों को मिलाकर गफलत न पैदा कीजिए।
माननीय श्री के. सन्थानम्ः 167-क के अन्दर दोनों ही आ जाती हैं।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः ऐसा हो सकता है। मैं मसले को समझाए देता हूँ। सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है, कि किस तरह की प्रक्रिया हम इसके लिए निर्धारित करते हैं। अगर हम यह प्रक्रिया बरतना तय करते हैं कि अभ्यर्थी चुनाव के लिए अर्ह है या नहीं, इसे हम आरम्भिक प्रश्न यानी चुनाव से पहले उठने वाला प्रश्न मानेंगे तो उस हालत में अनुच्छेद 167 नहीं लागू होगा। पर इसके प्रतिकूल अगर हम यह वर्तमान प्रक्रिया बरतते हैं कि चुनाव सम्बन्धी सभी प्रश्नों पर मय इस प्रश्न के कि अभ्यर्थी चुनाव के लिए अर्ह है या नहीं, विचार किया जा सकता है, तो उस हालत में अनुच्छेद 167 लागू होगा। मेरा तथा मसौदा-समिति का इरादा यही है कि एक ऐसा प्रावधान कर दिया जाए जिसके अनुसार निर्वाचन आयोग कतिपय आरंभिक प्रश्नों का निपटारा कर दे ताकि चुनाव के सम्बन्ध में जो विवाद उठें, वह केवल इसी प्रश्न को लेकर कि चुनाव ठीक तरह से प्रचालित हुआ था या नहीं। पर यहाँ यह सारी बातें एक ही जगह रख दी गई हैं।
माननीय सभापतिः अब आता है श्री टी.टी. कृष्णमाचारी का संशोधनः
फ्कि संशोधन सूची के संशोधन नं. 2441 के स्थान पर निम्नलिखित नया संशोधन रखा जाएः