अनुच्छेद 270 - Page 203

184 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

फ्उच्च न्यायालय का सभी न्यायालयों पर अधीक्षण का अधिकार।य्

मैं यह भी प्रस्तुत करता हूँः

फ्कि अनुच्छेद 203 के खंड (2) में ‘उच्च न्यायालय’ शब्दों से पहले ‘बिना किसी पूर्वाग्रह के सामान्यतः पूर्ववर्ती उपबंधों’ शब्द रखे जाएँ।य्

मैं यह भी प्रस्तुत करता हूँः

फ्संशोधनों की सूची के संशोधन संख्या 2664 के संदर्भ में -

( i ) अनुच्छेद 203 के खंड (1) में ‘सभी न्यायालय’ शब्दों के बाद ‘और

अधिकरण’ शब्द रखे जाएं_

( ii ) अनुच्छेद 203 के खंड (2), उपखंड (ख) हटा दिया जाए।य्

संशोधन स्वीकृत हुए।

(उपर्युक्त संशोधनों के साथ संशोधित अनुच्छेद 203 संविधान में जोड़ा गया।)

* * * * *

अनुच्छेद 270

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमान्, मैं प्रस्ताव करता हूँः

फ्कि संशोधनों की सूची के संशोधन संख्या 2975 और 2976 के सम्बन्ध में, अनुच्छेद 270 में फ्परिसंपत्तियाँ और दायित्वय् शब्दों के स्थान पर फ्परिसंपत्तियाँ, दायित्व और बाध्यताय् शब्द रखे जाएं।य्

जहाँ तक मि. नजरुद्दीन अहमद के संशोधन का सम्बन्ध है, क्या मैं यह कह सकता हूँ कि वे यह भूल गए हैं कि इस संविधान के अधीन जो सरकार अस्तित्व में आएगी उसे हमने ‘भारत सरकार’ कहा है और इस समय की सरकार को ‘भारत अधिराज्य की सरकार’ कहा है इसलिए, यदि उनका संशोधन स्वीकार कर लिया गया तो उसका अर्थ यह होगा कि भारत सरकार, भारत सरकार के दायित्वों, आभारों और परिसंपत्तियों की उत्तराधिकारिणी होगी। यह बहुत बेढंगा पाठ होगा। इसलिए जो शब्द रखे गए हैं, वे उपयुक्त हैं और उन्हें रहने देना चाहिए।

* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 14 जून, 1949, पृ. 873

+ पूर्वोक्त, पृष्ठ 873

++ पूर्वोक्त, पृष्ठ 15 जून, 1949, पृष्ठ 875

# पूर्वोक्त, पृष्ठ 877