अनुच्छेद 270 - Page 206

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अब अन्त में हम उन राज्यों के प्रश्न को उठाते हैं जो प्रान्तों में समाविष्ट हो गए हैं। उनके सम्बन्ध में अनुच्छेद 270 के कारण कोई कठिनाई नहीं उपस्थित हो सकती। एक उदाहरण लीजिए। यदि कोई राज्य किसी भारतीय प्रान्त में समाविष्ट हुआ है तो यह स्पष्ट है कि समाविष्ट राज्य और निकटवर्ती प्रान्त के बीच इस संबंध में कोई करार हुआ होगा कि समाविष्ट राज्य के दायित्वों और परिसंपत्तियों के सम्बन्ध में क्या किया जाएगा। उस करार में यह अवश्य तय किया जाएगा कि ये दायित्व समाप्त हो जाएंगे अथवा समाविष्ट राज्य या वह भारतीय प्रान्त, जिसमें वह राज्य समाविष्ट हुआ हो, इन दायित्वों का निर्वहन करेगा। इस अनुच्छेद में यह कहा गया है कि संविधान के प्रवर्तन में आने पर (ये शब्द महत्त्वपूर्ण हैं और इस समय मैं यह मान लेता हूँ कि वह 26 जनवरी को प्रवर्तन में आएगा) उस प्रान्त का, जिसमें कोई राज्य समाविष्ट हुआ हो, यह दायित्व होगा कि वह उस करार का निर्वहन करे जो उसके तथा समाविष्ट राज्य के बीच हुआ हो। यदि संविधान के प्रवर्तन में आने के पूर्व कोई करार न हुआ हो तो केन्द्रीय सरकार तथा प्रान्तीय सरकारों को इसकी स्वतंत्रता होगी कि वे उस एकक अथवा समाविष्ट राज्य अथवा किसी अन्य एकक के सम्बन्ध में जो भी नए आभार चाहे, स्वीकार करे। इसलिए संविधान के प्रवर्तन में आने के पश्चात् जो भी आदान-प्रदान होगा, वह उस करार के अनुसार होगा, जिसे प्रान्त संविधान के अधीन स्वतंत्रता से कर सकेंगे। इसलिए इस संबंध में कोई उपबंध रखने की आवश्यकता नहीं है। अन्य राज्यों के सम्बन्ध में, जैसा कि मैं मैसूर के बारे में कह चुका हूँ, उन्हें इसकी स्वतंत्रता होगी कि वे अपना प्रबन्ध स्वयं करें। जब यह व्यवस्था की जाएगी हम उसे भाग प्प्प् में राज्यों के विशेष उपबंधों के संबंध में अधिनियम बनाते समय उसे निस्संदेह रूप से समाविष्ट कर लेंगे। इसलिए जहाँ तक अनुच्छेद 270 का सम्बन्ध है, मेरे विचार से उसके कारण कोई कठिनाई नहीं होगी। मेरे विचार से उसे उसके वर्तमान रूप में ही स्वीकार कर लेना चाहिए।

श्री महावीर त्यागीः क्या मैं यह जान सकता हूँ कि जिस करार का निर्देश किया गया है, वह केवल वित्तीय करार ही है अथवा उसका क्षेत्र सम्बन्धी करार भी है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः उसका सम्बन्ध संपत्तियों, दायित्वों और बाध्यताओं से है। उदाहरणार्थ यदि किसी प्रान्त ने किसी राज्य को समाविष्ट किया है और वहाँ के नरेश को कोई निवृत्ति वेतन देने का आभार स्वीकार किया है तो अनुच्छेद 270 के अधीन वह आभार समझा जाएगा। क्षेत्र के संक्रमण के सम्बन्ध में अन्य उपबंध होंगे।

श्री एच.वी. कामतः क्या मैं जान सकता हूँ कि हाशिए के उप-शीर्षक में ‘अधिकार’ शब्द को रखने पर भी अनुच्छद से उसे क्यों निकाल दिया गया है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मसौदा-समिति इसकी ओर ध्यान देगी।

श्री बी. दासः भारत की विदेशों में विशेषकर इंग्लैंड में जो सम्पत्ति है, क्या उनके