189
मूल्यवान चीजें संघ में निहित होंगी तथा संघ के प्रयोजन के लिए धारण की जाएंगी।
यह एक बहुत महत्त्वपूर्ण अनुच्छेद है। हम भारत के राज्य-क्षेत्रंमें कई ऐसे राज्यों को समाविष्ट करने जा रहे हैं, जो समुद्र तटवर्ती हैं। यह सम्भव है कि ये राज्य यह प्रश्न उठाएँ कि उनके जल-प्रांगण में समुद्र के नीचे की वस्तुएँ उन्हीं की सम्पत्ति हैं। इस प्रकार के तर्क का खण्डन करने के लिए इस अनुच्छेद को प्रविष्ट करना आवश्यक है।
* * * * *
श्री एच.वी. कामतः इसके अतिरिक्त अनुच्छेद में कहा गया है, फ्भारत के जल-प्रांगण में, समुद्र के नीचे की सब भूमियां, खनिज तथा अन्य मूल्यवान चीजें।य् प्रथम अनुसूची में हमने राज्यों की तथा भारत राज्य-क्षेत्र की परिभाषा की है। किन्तु इस अनुच्छेद में कहीं भी ‘भारत के जल-प्रांगण’ की परिभाषा नहीं की गई है। संविधान इस सम्बन्ध में मौन है।
माननीय सभापतिः अन्तर्राष्ट्रीय विधि में यह पदावली सुस्पष्ट है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इसकी पृथक रूप से परिभाषा करने की आवश्यकता नहीं है।
श्री एच.वी. कामतः मुझे आशा है कि इसके पूर्व कि इस अनुच्छेद पर मत लिया जाए, डॉ. अम्बेडकर स्थिति को स्पष्ट करेंगे।
श्री ए. थानू पिल्लै (ट्रेवनकोर राज्य)ः अध्यक्ष महोदय, मुझे आशा है कि डॉ. अम्बेडकर सभा को इस बारे में अवगत कराएँगे कि इस अनुच्छेद को जिन शब्दों में लिखा गया है, इसकी क्या आवश्यकता है।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः क्या मैं यह जान सकता हूँ कि मुझे किस बात की व्याख्या करनी है।
श्री एम. अनन्तशयनम् आयंगरः मैं तो यह चाहता हूँ कि ये शब्द रखे जाएँ फ्जल-प्रांगण में समुद्र के नीचे की सब भूमियां, खनिज तथा अन्य मूल्यवान चीजें तथा भारत का जल-प्रांगण संघ में निहित होगा तथा संघ के प्रयोजनों के लिए धारण किया जाएगा।य्
एक माननीय सदस्यः वायु का क्या होगा?
एक अन्य माननीय सदस्यः आकाश का क्या होगा?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमान्, संशोधन को उपस्थित करते समय
* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 15 जून, 1949, पृ. 886
+ पूर्वोक्त, पृष्ठ 887
++ पूर्वोक्त, पृष्ठ 887
# पूर्वोक्त, पृष्ठ 888