नवीन अनुच्छेद 271-क - Page 209

190 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मैंने यह बताया था कि हमने एक प्रकार के अनुच्छेद को प्रविष्ट करना क्यों आवश्यक समझा। इस सम्बन्ध में मेरे माननीय मित्र श्री पिल्लै ने यह सन्देह प्रकट किया है कि इससे मत्स्य-क्षेत्र सम्बन्धी अधिकार भी सम्मिलित हो सकता है। मैं उनका ध्यान इस ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ कि मत्स्य-क्षेत्र सूची- II - प्रविष्टी संख्या 29 में अंकित है।

श्री ए. थानू पिल्लैः मैंने अन्य विषयों के सम्बंध में भी आपत्ति की थी।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मैं उनके सम्बंध में भी बोलूँगा। इस समय मैं इसी विषय पर अपने विचार प्रकट कर रहा हूँ। मत्स्य-क्षेत्रों के सम्बंध में सूची-प्प् में स्पष्ट शब्दों में प्रविष्टि का अर्थ यह है कि केन्द्रीय सरकार का जल-प्रांगण के सम्बंध में जो भी क्षेत्रधिकार होगा वह सूची- II की प्रविष्टि संख्या 29 के अधीन होगा। इसलिये भारत के जल प्राँगण में भी जो मत्स्य-क्षेत्र हो, वे भी प्रान्तीय विषयों के अन्तर्गत आते हैं। मेरे माननीय मित्र श्री पिल्लै अब इसे स्पष्टतया समझ गये होंगे।

पहले प्रश्न के सम्बन्ध में स्थिति इस प्रकार है। जैसा कि मेरे माननीय मित्र श्री अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर ने बताया है, अमेरिका में यह प्रश्न उठाया गया था कि जल-प्रांगण पर संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार का अधिकार है अथवा विभिन्न राज्यों का, क्योंकि यह आपको विदित ही है कि अमेरिका के संविधान के अधीन केन्द्रीय सरकार को केवल वही शक्तियाँ प्राप्त हैं जो उसे स्पष्ट शब्दों में प्रदान की गई हैं। इसलिए अमेरिका में, मेरे विचार से, अभी यह विवादग्रस्त प्रश्न ही है कि जल-प्रांगण राज्यों का है अथवा केन्द्र का। हमने यह विचार किया कि यह इतना महत्त्वपूर्ण विषय है कि हमें इसे छोड़ना नहीं चाहिए क्योंकि आगे चलकर इसके सम्बन्ध में अनुमान लगाया जा सकता है अथवा विवाद उठ खड़े हो सकते हैं अथवा दावे उपस्थित किए जा सकते हैं। साधारणतया यही समझा जाता है कि किसी राज्य का क्षेत्र उसकी भूमि तक ही सीमित नहीं होता अपितु उसके आगे समुद्र में तीन मील तक विस्तृत होता है। यह सामान्यतः अन्तर्राष्ट्रीय विधि में सन्निहित है। भय यह है और मैं इसे छिपाना नहीं चाहता कि यदि कुछ तटवर्ती राज्य, जैसे कोचीन, ट्रेवनकोर अथवा कुछ भारतीय संघ में समाविष्ट होंगे तो यदि संविधान में इस प्रकार का कोई उपबंध न होगा तो वे यह कह सकते हैं कि उनके समाविष्ट होने से केन्द्रीय सरकार को उनके भौतिक क्षेत्र के सम्बन्ध में क्षेत्राधिकार प्राप्त होता है किन्तु उनका वह क्षेत्र जिसमें उनका जल-प्रांगण भी सम्मिलित है, केन्द्रीय सरकार के क्षेत्राधिकार के अन्तर्गत नहीं आता और उनके क्षेत्र तथा जल-प्रांगण पर, जो अन्तर्राष्ट्रीय विधि के अधीन और समाविष्ट के पूर्व उनको ही प्राप्त था, उनका ही क्षेत्राधिकार रहेगा। इसलिए संविधान में हम इसका स्पष्ट शब्दों में उल्लेख कर देना चाहते हैं कि यदि कोई तटवर्ती राज्य भारतीय संघ में समाविष्ट होगा तो उस तटवर्ती राज्य का जल-प्रांगण केन्द्रीय सरकार के अधिकार में आ जाएगा। इस प्रकार के प्रश्न के सम्बन्ध में कोई विवाद नहीं उठाया