नवीन अनुच्छेद 271-क - Page 210

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जा सकेगा और न उसे न्यायालय में ही घसीटा जा सकेगा। इसी कारण हम अनुच्छेद 271-क में इस प्रकार का उपबंध रख रहे हैं।

श्री एम. अनन्तशयनम् आयंगरः जल-प्रांगण के स्वामित्व का क्या होगा?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः आप जल-प्रांगण पर स्वामित्व का अधिकार क्यों चाहते हैं। इसके पश्चात् आपकी यह इच्छा हो सकती है कि आवश्यक आकाश पर भी आपका अधिकार हो।

श्री एम. अनन्तशयनम् आयंगरः नमक आदि के उत्पादन के लिए।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः उस क्षेत्र में आपकी विधियाँ प्रवर्तन में रहेंगी, आप चाहे जो भी विधियाँ निर्मित करें, उनका विस्तार भूमि से तीन मील तक के क्षेत्र पर रहेगा। इसकी आवश्यकता है और आपको इस अनुच्छेद से प्राप्त हो जाता है।

श्री महावीर त्यागीः जल-प्रांगण को सम्मिलित नहीं किया गया है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अन्तर्राष्ट्रीय विधि के अधीन अर्थात् किसी राज्य के राज्य-क्षेत्र में केवल भूमि ही नहीं, बल्कि तीन मील आगे तक का क्षेत्र सम्मिलित होता है। आप जो भी विधि निर्मित करेंगे उसका प्रवर्तन उस क्षेत्र में भी होगा।

श्री महावीर त्यागीः अवशिष्ट जल-प्रांगण का क्या होगा?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः आकाश के नीचे जो कुछ भी होगा वह आपका होगा।

श्री महावीर त्यागीः तीन मील के आगे के जल-प्रांगण का क्या होगा?

श्री एम. अनन्तशयनम् आयंगरः क्या मैं डॉ. अम्बेडकर से पूछ सकता हूँ कि क्या उन्हें यह विदित है कि जल-प्रांगण भी अन्य प्रकार की सम्पत्ति के समान ही है और अन्य सम्पत्ति से श्रेष्ठ भी कही जा सकती है और जल-प्रांगण के सम्बन्ध में बहुत विवाद होते हैं? किसी प्रान्त और संघ के बीच विवाद न होने देने के लिए क्या यह आवश्यक नहीं है कि जल-प्रांगण को भी भारतीय संघ की सम्पत्ति में सम्मिलित किया जाए?

माननीय सभापतिः इसका उत्तर दिया जा चुका है। उनका यह विचार है कि इसके उल्लेख की आवश्यकता नहीं है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः भूमि के ऊपर जो कुछ हो वह भूमि में ही सम्मिलित किया जाता है। यदि भूमि के ऊपर कोई पेड़ हो तो वह भूमि में ही सम्मिलित किया जाएगा। जल भूमि के ऊपर होता है, इसलिए भूमि का ही भाग होगा।

एक माननीय सदस्यः श्रीमान् ...

* ख्., सीएडी, खण्ड VIII, दिनांक 15 जून, 1949, पृ. 91-93