अनुच्छेद 289 - Page 217

198 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

नवीन अनुच्छेद 274-क

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमान् मैं यह चाहता हूँ कि इस अनुच्छेद पर विचार-विमर्श स्थगित किया जाए।

माननीय सभापतिः इसके अतिरिक्त श्री सिंधवा का एक लम्बा संशोधन है जिसका उद्देश्य एक नवीन भाग प्रविष्ट करना है।

श्री टी.टी. कृष्णमाचारीः मैं यह सुझाव रखता हूँ कि सभा भाग 13 निर्वाचन विषयक अध्याय को उठाए, अर्थात् जैसा कि कार्यावली में अंकित है अनुच्छेद 289 पर और उसके आगे के अनुच्छेद पर विचार किया जाए।

श्री आर.के. सिंधवाः श्रीमान् मैं जिस नवीन अनुच्छेद को उपस्थित करना चाहता हूँ उसका सम्बन्ध स्थानीय क्षेत्रों अर्थात् सारे भारत के राज्य क्षेत्र के शहरी और देहाती क्षेत्रों के परिसीमन से है।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इसे स्थगित किया जा रहा है।

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अनुच्छेद 289

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः अध्यक्ष महोदय, मैं यह प्रस्ताव प्रस्तुत करता हूँ किः

फ्अनुच्छेद 289 के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएःय्

निर्वाचन का अधीक्षा नियंत्रण 289. (1) इस संविधान के अंतर्गत होने वाले समाज एवं निर्देशन निर्वाचन आयोग संसदीय सभी राज्यों के विधान -मंडल तथा राष्ट्रपति और में निहित होगा। उपराष्ट्रपति के निर्वाचन के तैयार होने वाली निर्वाचक

सूचियों का अधीक्षण निर्देशन एवं नियंत्रण के साथ-साथ

संसदीय तथा विधानमंडलों के दौरान उत्पन्न संदेहों तथा विवादों के निपटान के निर्वाचन अधिकरणों की नियुक्ति का अधिकार एक आयोग में निहित होगा जो इस संविधान में निर्वाचन आयोग के नाम से निर्विष्ट है। इसकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी।

(2) निर्वाचन आयोग मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा, यदि कोई हो तो, अन्य

निर्वाचन-आयुक्तों से, जितने कि राष्ट्रपति समय-समय पर नियत करे, मिलकर

बनेगा और जब कोई अन्य निर्वाचन आयुक्त इस प्रकार नियुक्त किया गया

हो तब मुख्य निर्वाचन आयुक्त निर्वाचन-आयोग के सभापति के रूप में कार्य

करेगा।