4 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सदस्यों का कार्यकाल किसी विशेष विधेयक, जिसके संबंध में सभा को परामर्श देने तथा उसकी सहायता करने हेतु उन सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा नामित किया गया हो, के संबंध में चल रही कार्यवाहियों तक ही सीमित रहेगा।
अनुच्छेद 67-क के दूसरे पैरा से यह स्पष्ट हो जाएगा कि उन लोगों को केवल चर्चा में भाग लेने का हक होगा, चाहे सभा के अन्दर पूर्णकालिक चर्चा चल रीह हो या किसी समिति विशेष में चर्चा चल रही हो, जिसके सदस्यों के रूप में सभा द्वारा उन्हें नामित किया गया हो, लेकिन उन लोगों को मतदान करने का हक बिल्कुल हीं होगा ताकि इन तीन सदस्यों को शामिल किए जाने से निश्चय ही सभा के मतदान करने की शक्ति प्रभावित नहीं होगी। मुझे विश्वास है कि सभा अनुच्छेद 67-क में अन्तर्विष्ट इस नए उपबंध को स्वीकार कर लेगी। मैं सभा को यह बताना चाहता हूँ कि सभा में विशेषज्ञों को नामित किए जाने से संबंधित अनुच्छेद 67-क में अन्तर्विष्ट उपबंध कोई नया सुझाव नहीं है। जिन सदस्यों को भारत सरकार अधिनियम, 1919 के बारे में जानकारी होगी, वे इस बात को जानते होंगे कि जब सभा में एक लोकप्रिय तत्त्व पुनःस्थापित किया गया था, तो उसमें भी एक उपबंध किया गया था, जिसके अन्तर्गत विभिन्न प्रान्तों के गवर्नरों को किसी विशेष मामले में कार्य करने हेतु विशेषज्ञों को नियुक्त करने की शक्ति प्रदान की गई थी, जब सभा में ऐसे किसी उपाय पर विचार किया जा रहा हो। मेरे विचार से यह एक उपयोगी उपबंध है और संविधान में इस तरह के उपबंध किए जाने से बहुत लाभ होगा।
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* माननीय सभापतिः सुझाव यह है कि इसके बारे में सभा में कोई सूचना प्रचलित नहीं की गई है और इसलिए सदस्यगण चाहते हैं कि उन्हें समय दिया जाए।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः सभा यदि इस मामले पर विचार को स्थगित रखना चाहती है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है।
माननीय सभापतिः हम लोग आज इसे स्थगित रखेंगे और इस पर बाद में विचार करेंगे।
अनुच्छेद 68
माननीय सभापतिः प्रस्ताव यह है किः
फ्अनुच्छेद 68 को संविधान का भाग बनाया जाए।य्
अब हम लोग इस अनुच्छेद के संशोधनों पर विचार करेंगे।
* ख्., खण्ड VIII, दिनांक 18 मई, 1949, पृ. 84